दुर्दांत दस्यु हनुमान पटेल के भाई अभिमन्यु को शिवपाल ने दिया टिकट, इलाहाबाद से लड़ेंगे चुनाव
प्रयागराज। 80 के दशक में यूपी से एमपी तक आतंक का पर्याय रहे दुर्दांत दस्यु हनुमान पटेल के भाई अभिमन्यु को शिवपाल यादव का पार्टी प्रसपा ने उम्मीदवार बनाया है। शिवपाल सिंह यादव ने अभिमन्यु पटेल को इलाहाबाद सीट से टिकट दिया। बता दें कि अभिमन्यु का यह पहला बड़ा चुनाव होगा, जिसमें उन्हें खुद को साबित करने के साथ टिकट देनी वाली शिवपाल यादव की पार्टी की उम्मीद पर भी खरा उतरना है। फिलहाल शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने इलाहाबाद संसदीय सीट पर तगडी घेराबंदी करते हुये सपा खेमे से अभिमन्यु पटेल जैसा एक बड़ा नाम अपनी ओर खींच लिया है। साथ ही अभिमन्यु को इलाहाबाद से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया है।

अभिमन्यु की पटेलों में अच्छी पकड़
अभिमन्यु की पकड़ पटेल बिरादरी के मतदाताओं पर बहुत अच्छी है और लगातार उनके परिवार से छोटे चुनाव लड़ने का क्रम चल रहा था। यह पहली बार है जब देश के सबसे बड़े चुनाव में वह जनता के बीच पहुंच रहे हैं। इससे पहले हनुमान पटेल का परिवार जब भी चुनाव लड़ा सपा समर्थित रहा है। अब जब सपा दो गुटों में बंट गयी है तो हनुमान पटेल का परिवार अखिलेश गुट का साथ छोड़कर शिवपाल के साथ नया सियासी सफर तय करने निकल चुका है।

हनुमान के दहशत से कांपते थे लोग
दस्यु सरगना हनुमान पटेल 80 के दशक का सबसे खूंखार डकैतों में से एक थे। जिसने कभी पुलिस के सामने घुटने नहीं टेके। हनुमान पटेल की दहशत उसके गांव जूही शंकरगढ के आस पास के इलाकों से शुरू हुआ जो धीरे धीरे शंकरगढ़, चित्रकूट, मिर्जापुर, रीवां आदि कई जिलों तक फैल गया। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की पुलिस ने सैकडों बार ऑपरेशन चलाकर हनुमान को पकडने का प्रयास किया, लेकिन उसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली। हनुमान आम गरीबों के हक में लडने वाला क्रांतिकारी कहा जाता था। आज से लगभग 35 साल पहले मुखबिरी पर हनुमान को पुलिस ने घेर लिया और फिर मुठभेड में मार गिराया था।
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शिवपाल सिंह यादव ने दिया टिकट
हनुमान की छवि गरीबों में काफी अच्छी थी और यही कारण था कि आज हजारों लोग उसकी मौत वाले दिनों परिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं। शंकरगढ इलाके में भव्य कार्यक्रम आदि का आयोजन किया जाता है। ददुआ की तरह हनुमान पटेल का भी मंदिर बनाने का प्रयास किया जा चुका है। हालांकि अभी सजातीय संगठन के लोग उसमें सफल नहीं हो सके हैं। लेकिन लोगों में अच्छी पहचान के चलते ही अब हनुमान के परिवार ने राजनीति में अपना कदम बढाया है। राजनीति में ही दस्यु सरगना हनुमान के बेटे की हत्या भी हो चुकी है। हालांकि उसके बाद हनुमान की पत्नी चुनाव लडती आयी हैं और अब उसके भाई अभिमन्यु ने भी लोकसभा चुनाव लडने के लिये प्रसपा से टिकट हासिल किया है।












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