प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने किया सस्पेंड, भेजे गए जेल
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की प्रयागराज पुलिस ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद को विदेशियों के शरण देने और कोरोना संक्रमण से संबंधित जानकारी न देने के आरोप में अस्थायी जेल भेज दिया है। प्रोफेसर के साथ विदेशी जमातियों और अन्य सहयोगियों को भी जेल में शिफ्ट किया गया है। प्रोफेसर पर पुलिस ने महामारी एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है और मामले की जांच चल रही है। आगे एक्शन लेते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद को सस्पेंड कर दिया है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने इस बारे में कहा है कि उनका निलंबन 21 अप्रैल से प्रभावी है।

गिरफ्तार 30 लोगों को जेल किया गया शिफ्ट
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद को पुलिस ने सोमवार की रात को गिरफ्तार किया था। अन्य गिरफ्तार किए गए 29 लोगों में 16 विदेशी हैं जो जमात में हिस्सा लेने आए थे। दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में भाग लेने के बाद प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद प्रयागराज लौटे तो कई दिन तक यूनिवर्सिटी जाते रहे। इस दौरान वे कई शिक्षक, कर्मचारी और अन्य लोगों से मिले थे। साथी ही उन्होंने तीन सौ से अधिक विद्यार्थियों की परीक्षा भी ली थी।
प्रशासन की चेतावनी को किया नजरअंदाज
दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से लौटे जमातियों के छिपने पर पुलिस-प्रशासन और सरकार बार-बार चेतावनी दे रही थी कि ऐसे लोग अपने बारे में जानकारी दें। इसके बावजूद प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद ने दिल्ली मरकज से लौटने की जानकारी न सिर्फ छुपाई बल्कि विदेशी जमातियों को मस्जिद में छुपने की व्यवस्था भी की। पकड़े जाने के बाद सबको क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया था। जब वहां समय पूरा हो गया तो सबको गिरफ्तार कर लिया गया।
1988 में मिली थी नौकरी
मऊ के बुलाकी का पुरा निवासी मोहम्मद शाहिद को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में 1988 में नौकरी मिली थी। उस समय वे यहां के राजनीति विज्ञान विभाग में लेक्चरर बने थे। इसके बाद वे प्रमोट होते-होते 2015 में प्रोफेसर बने थे।












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