यूपी: राम मंदिर मुद्दे पर 30 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 31 को कुंभ में बुलाई गई धर्म संसद, ये दिग्गज होंगे शामिल
Allahabad News,(इलाहाबाद)। राम मंदिर और हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर देश में चल रही सियासी गर्मी के बीच धर्म संसद बुलाए जाने का क्रम कुंभ मेले के दौरान भी जारी रहेगा। लोकसभा चुनाव की आहट और छटपटाहट के बीच 31 जनवरी से 1 जनवरी तक यानि दो दिवसीय धर्म संसद का आयोजन कुंभ मेले में किया जाएगा। खास बात यह है कि अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 30 जनवरी को सुनवाई होगी और अगली ही सुबह प्रयागराज में धर्म संसद बुलाई गई है। इसके कई सियासी मायने हैं और इसका व्यापक प्रभाव व फायदा भी मिलेगा। चूंकि धर्म संसद का आयोजन विश्व हिंदू परिषद की ओर से होगा, जिसमें देशभर के धर्माचार्यों के साथ हिंदूवादी दिग्गज जुटेंगे। नाम व आयोजन स्थल के सापेक्ष यह धर्म संसद सनातन धर्म से जुड़े विषय पर ही होनी है, लेकिन इस धर्म संसद में राजनैतिक चेहरों का जुटना कुछ और ही कहानी कह रहा है। चूंकि धर्म संसद में संघ प्रमुख मोहन भागवत और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल होंगे, ऐसे में इस आयोजन को आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

2014 में संतो ने दिया था साथ
जैसा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में संतों ने बीजेपी के लिए फायर ब्रांड नेता की तरह खूब प्रचार-प्रसार किया था और बीजेपी के लिए बड़ी संख्या में वोट बटोर कर तत्कालीन हिंदूवादी चेहरे नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया था। पिछले 5 सालों में कट्टर हिंदुत्व का चेहरा रहे नरेंद्र मोदी के उदार हिंदूवादी चेहरे में बदल जाने के बाद अब बीजेपी के लिए संतों का आशीर्वाद अपने साथ बनाए रखना कड़ी चुनौति है। बीते 5 सालों से राम मंदिर व हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर संतों और बीजेपी के बीच अनबन बनी रही है और संतों की समय समय पर नाराजगी जाहिर भी होती रही है। ऐसे में संघ प्रमुख मोहन भागवत और बीजेपी प्रमुख अमित शाह एक बार फिर से संतों का साथ जुटाने की कवायद कुंभ मेले में धर्म संसद के दौरान करेंगे।
संभावना है कि संतों को अपने साथ करने के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह राम मंदिर पर बड़ी घोषणा कर सकते हैं। चूंकि कुंभ मेले के दौरान पूरे देश से हिंदुत्व का ध्वज लहराने वाले संत और उनके अनुयायी यहां मौजूद होंगे। ऐसे में बीजेपी एक साथ पूरे देश में अपने हिंदुत्व मुद्दे को मास्टर कार्ड की तरह चल सकती है। अगर राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट से रुख साफ ना हुआ तो बीजेपी इस मामले पर अपना रुख साफ कर वोटों के ध्रुवीकरण का मौका नहीं छोड़ेगी। चूंकि धर्म संसद लगने से एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में यह मामला सुना जाने लगेगा, जिससे इस मुद्दे की गर्माहट बेहद ही तीक्ष्ण रूप से आगामी लोकसभा चुनाव पर पड़ेगी।

मंदिर निर्माण के लिए है धर्म संसद
विश्व हिंदू परिषद कुंभ मेले के दौरान हमेशा से धर्म संसद का आयोजन करती रही है। इस बार धर्म संसद के आयोजन का विषय खास है। अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण के लिए कुंभ मेले के दौरान दो दिवसीय धर्म संसद बुलाई गई है। खास बात यह है कि अभी तक वीएचपी की कुंभ मेले में जो धर्म संसद होती थी। उसमें सामान्यतः उसके मार्गदर्शक मंडल के सदस्य व कुंभ में प्रवास कर रहे प्रमुख धर्माचार्यों को ही बुलाया जाता है, लेकिन लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हो रही इस बार की धर्म संसद में कई राजनैतिक हस्तियों भी शामिल हो रही हैं। संघ प्रमुख भागवत व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के इस कार्यक्रम में शामिल होने से लोकसभा चुनाव में संतों को अपने साथ फिर से लेकर चलने की योजना को बल मिल रहा है। वैसे भी विश्व हिंदू परिषद में इस बार किसी संत के पंडाल में या धर्म संसद ना बोला कर वीएचपी के पंडाल में ही आयोजन कर रही है। यानि इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा को विशेष तौर पर नियोजित किया गया है।

ये होंगे शामिल
अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 30 जनवरी को सुनवाई होगी और अगली सुबह प्रयागराज में धर्म संसद सजेगी। धर्म संसद का उद्घाटन संघ प्रमुख करेंगे और समापन बीजेपी अध्यक्ष कर हिंदुत्व के मुद्दे को हवा देंगे। वीएचपी के प्रांत प्रमुख और कुंभ मेला प्रभारी मुकेश ने बताता कि विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद में देशभर के बड़े संत, शंकराचार्य व धर्माचार्यों के अलावा बौद्ध धर्म गुरु दलाईलामा, आर्ट आफ लिविंग के प्रमुख श्री श्री रविशंकर, गायत्री परिवार के संचालक डा० प्रणव पांड्या, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख मोहन भागवत, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह आदि बड़े नाम शामिल हैं। फिलहाल धर्म संसद में संतों की तरफ से राम मंदिर निर्माण का मुद्दा प्रमुख और अनिवार्य है। जिस पर संघ प्रमुख मोहन भागवत व अमित शाह बडा ऐलान कर सकते हैं।

लाग लपेट की बजाय सीधा होगा सामना
राम मंदिर का मुद्दा हो या हिंदुत्व को लेकर संतों की नाराजगी। मंदिर निर्माण को लेकर राज्य सरकार या केंद्र कि एक दूसरे के ऊपर निर्भरता हो या अध्यादेश लाने जैसा विषय। सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कानूनी कदम व जातिगत रूप में बंटते हिंदुओं की समस्या को लेकर उपजा मुद्दा आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए नुकसानदायक साबित होंगे। यह बात बीजेपी भी जान चुकी है। ऐसे में विहिप की कोशिश है कि वह सरकार, बीजेपी, संघ प्रमुख व योगी आदित्यनाथ को देश भर के संतों से सीधे आमना सामना कराए। यहां न लाग लपेट होगी और ना ही कैमरे की असुरक्षा नजर आएगी । सीधे मुद्दों पर बात होगी और बीजेपी की मनसा व संतों की इच्छा पर साफ-साफ निर्णय हो सकेगा । विश्व हिंदू परिषद के पंडाल में ही धर्म संसद के आयोजन की यह भी एक बड़ी वजह है। चूंकि नाराज संतो के सामने अमित शाह, सीएम योगी के अलावा संघ प्रमुख भी आमने सामने होंगे तो आगामी चुनाव, राम मंदिर व हिंदुत्व को मुद्दे पर बीजेपी की रणनीति व स्थिति भी सनातन संतों के सम्मुख स्पष्ट हो जाएगी। अगर संतों का भरोसा बीजेपी पर फिर से जागा तो इसका फायदा बीजेपी को हर तरह से लोक सभा चुनाव मे मिलेगा।












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