अयोध्या विवाद पर सीएम योगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आयेगा, साधु संत उसका सम्मान करें
इलाहाबाद / प्रयागराज । अयोध्या विवाद पर जैसे-जैसे फैसले का वक्त नजदीक आ रहा है, यूपी समेत पूरे देश की सांसे तेज हो रही हैं और सबसे गंभीर स्थिति साधु संतों में भी देखने को मिल रही है। वर्षों से राम मंदिर निर्माण की उम्मीद लगाये साधु संत अब सुप्रीम कोर्ट की ओर टकटकी लगाये हुये हैं।

फैसला आने के बाद साधु संतों में संयम बना रहे इसके लिये लगातार शासन स्तर पर प्रयास जारी है और उसी क्रम में सीएम योगी ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी से अपने आवास पर मुलाकात की और लंबी बातचीत करते हुये संतों को संयम बरतने की अपील की।
सीएम योगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आयेगा, साधु संत उसका सम्मान करें और पूर्णत: संयम बरतें। सीएम योगी ने इस दौरान जन अपील करते हुए कहा कि देश के सभी नागरिकों को भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिये। गौरतलब है कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में डेढ महीने से ज्यादा चली नियमित सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानित पीठ ने 16 अक्टूबर को अयोध्या विवाद का फैसला सुरक्षित कर लिया है।
चूंकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में उनके रिटायरमेंट से पहले ही अयोध्या विवाद पर फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है । अब फैसला आने से पहले शांति व्यवस्था पूरी तरह से बनी रहे, उसके मद्देनजर सीएम योगी ने शनिवार को महंत नरेंद्र गिरी से मुलाकात की। यह मुलाकात लगभग दो घंटे तक चली और लंबी वार्ता के बाद अखाडा परिषद के संत संतुष्ट नजर आये। इस बावत जानकारी देते हुये महंत नरेंद्र गिरी ने बताया कि सीएम से अयोध्या प्रकरण और प्रयागराज में लगने वाले माघ मेले को लेकर वार्ता हुई है।
आयोध्या पर सु्प्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा संत उसका सम्मान करें, ऐसी अपील सीएम की ओर से की गई है। जबकि माघ मेले के भव्य आयोजन का उन्होंने भरोसा दिया है। इस बार के माघ मेले में बिजली, स्वच्छता और स्वास्थ के लिये व्यापक इंतजाम होंगे और शाही स्नान से लेकर पूरे कल्पवास तक साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए निर्मल व प्रर्याप्त गंगाजलमिल सके इसका भी प्रबंध किया जायेगा।
बता दें कि जनवरी महीने में एक महीने का माघ मेला हर वर्ष की तरह इस बार भी संगम की रेती पर लगेगा और पूरे देश से लाखों लोग यहां एक महीने का कल्पवास करने के लिये एकत्रित होंगे। यह आयोजन भी कुंभ सरीखा होता है, हालांकि इसकी व्यापकता और क्षेत्र सीमित होता है।












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