आगरा: हाथरस कांड के विरोध में सफाई व्यवस्था ठप, वाल्मीकि समाज के लोगों ने किया पुलिस पर पथराव

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में हाथरस कांड का असर है। सफाईकर्मियों ने यहां चार दिन से काम बंद कर रखा है। शहर में जगह-जगह कूड़ा बिखरा हुआ है और गंदगी की वजह से बुरा हाल है। शनिवार को काम बंद करने को लेकर सफाई कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच तकरार हो गई। सफाईकर्मियों ने आवास विकास कॉलोनी के स्वच्छता निरीक्षक और जोनल अधिकारी को बंधक बना लिया। कोठी मीना बाजार के पास हाथरस कांड का विरोध कर रहे लोगों ने हंगामा करते हुए पुलिस पर पथराव कर दिया। सूचना मिलने पर मौके पर फोर्स पहुंची और पथराव कर रहे लोगों को खदेड़ दिया।

Protesting against Hathras incident stone pelted on police in city

पथराव की यह घटना कोठी मीना बाजार के पास नगर निगम के आईडीएच वर्कशॉप पर हुई जहां वाल्मीकि समाज के लोग हंगामा करते हुए हाथरस पीड़िता के लिए न्याय की मांग कर रहे थे। उन्होंने पुलिस पर पथराव कर दिया। पथराव की सूचना पर डीएम प्रभु एन सिंह, एसएसपी बबलू कुमार और नगर आयुक्त निखिल टीकाराम फोर्स के साथ पहुंचे। पुलिस फोर्स ने पथराव कर रहे लोगों को खदेड़कर तितर-बितर कर दिया। आगरा एसपी बीआर प्रमोद ने कहा कि पुलिस हालात पर नजर बनाए हुए है। साइबर टीम सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट की लगातार निगरानी कर रही है। सभी लोगों से शांति बनाए रखने की मैं अपील करता हूं।

Protesting against Hathras incident stone pelted on police in city

वाल्मीकि महापंचायत के फैसले का विरोध
शुक्रवार शाम को नगर आयुक्त निखिल टीकाराम फुंडे और वाल्मीकि महापंचायत के सदस्यों व कर्मचारी नेता श्याम करुणेश के साथ बैठक हुई। इस बैठक के बाद वाल्मीकि महापंचायत के चौधरी मानसिंह ने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को समाप्त करने का ऐलान किया था लेकिन समाज के ही अन्य लोग व सफाई कर्मचारी इस फैसले के विरोध में आ गए हैं। शनिवार सुबह विजय नगर कॉलोनी में वाल्मीकि समाज व सफाई कर्मचारियों ने विरोध करते हुए क्षेत्र में सफाई कार्य को ठप रखा और अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए वाल्मीकि महापंचायत के चौधरी मानसिंह और कर्मचारी नेता श्याम कुमार करूणेश के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सफाईकर्मियों ने दोनों का पुतला दहन करने के साथ ही हाथरस की बेटी के लिए इंसाफ की मांग की। वाल्मीकि महापंचायत के इस फैसले का विरोध शहर के कई स्थानों पर देखने को मिला। यह पहली बार हुआ है जब समाज के लोगों ने महापंचायत का फैसला न माना हो।

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