फिर टला आगरा-मेरठ में हाई कोर्ट की बेंच का मामला

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। आगरा या मेरठ में इलाहाबाद हाई कोर्ट की पीठ स्थापित करने की बीते दशकों से चल रही मांग फिर ठंडे बस्ते में चली गई है। सरकार ने साफ कर दिया कि उच्‍च न्‍यायालय की आगरा में पीठ स्‍थापित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

Uttar Prdaesh

मेरठ की अनदेखी

उधर, मेरठ को लेकर तो सरकार की तरफ से एक शब्द भी नहीं कहा गया। हालांकि मेरठ के निचली अदालतों के वकील बीते दशकों से इस मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मेरठ से संबंध रखने वाले वरिष्ठ एडवोकेट सुरेन्द्र रस्तोगी ने कहा कि सरकार के इस कदम से साफ है कि उसकी तरफ से पश्चिम उत्तर प्रदेश की जनता को सस्ता न्याय दिलाने को लेकर वह कतई गंभीर नहीं है।

दरअसल मीडिया में कुछ ऐसी खबरें थी कि केन्‍द्रीय वि‍धि और न्‍याय मंत्री डी.वी. गौड़ा ने कथित रूप से बयान दिया है कि इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की पीठ आगरा में स्‍थापित की जानी है।

सरकार की तरफ से साफ किया गया कि किसी उच्‍च न्‍यायालय की पीठ स्‍थापित करने की प्रक्रिया यह है कि उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायधीश और संबन्धित राज्‍य के राज्‍यपाल के परामर्श से संबन्धित राज्‍य सरकार द्वारा एक पूर्ण प्रस्‍ताव दिया जाना चाहिए।

नेताओं के वादे

जानकारों का कहना है कि आगरा और मेरठ के सभी दलों के नेता चुनावी मौसम में यह जरूर वादा करते हैं कि वे इलाहाबाद हाई कोर्ट की पीठ की स्थापना करवाएंगे। चौधरी अजीत सिंह तो दशकों इस तरह का वादा करते रहे। बहरहाल एक बात साफ है कि सरकार के उक्त फैसले से हजारों वकीलों और लाखों लोगों को जरूर निराशा हुई होगी।

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