मुजफ्फरनगर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
नयी दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके मुजफ्फरनगर और उसके पास के इलाकों में भड़की हिंसा में अबतक 47 लोगों की मौत हो चुकी है। जातीय हिंसा ने सैकड़ों लोगों को तबाह कर दिया है। कामकाज ठप हो गया है। वहीं आज इस ममाले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा की जांच सीबीआई द्वारा कराए जाने की मांग वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
छोटे ही बात से लेकर भड़की इस हिंसा के बाज लोगों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। वहीं हिंसा रोकने में नाकाम रही उत्तर प्रदेश भी सवालों के कठघरे में आ गई है। विरोधी प्रदेश की अखिलेश सरकार पर निशाना साध रहे है। कांग्रेस समेत विरोधी पार्टियां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का इस्तीफा मांग रही है तो वहीं सूबे की सरकार इस हिंसा के पीछे राजनीतिक साजिश की आशंका जाहिर कर रही है। लोग इस हिंसा मामले की जांच सीबीआई से चाहते है।

ऐसे में आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनने होनी है। छोटे से विवाद के बाद भड़की हिंसा में अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है। व्यापक पैमाने पर हिंसा की घटना की जांच की मांग करते हुए नौ याचिकाकर्ताओं ने करीब 20,000 पीड़ितों के उपयुक्त पुनर्वास सहित उनके लिए अस्थाई निवास की व्यवस्था करने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका पेश करते हुए वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि प्रदेश सरकार की लापरवाही के कारण मुजफ्फरनगर में 47 लोगों की जानें चली गई, जबकि ,सरकार का काम लोगों को बचाना है ना कि मारना। ऐसे में ये याचिका पीड़ितों के गुस्से का एक प्रतीक है और पीड़ितों के बीच जाति, पंथ या रंग के आधार पर कोई भेद नहीं किया जा सकता।












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