अकेले देश-दुनिया घूमना चाहते हैं भारतीय टूरिस्ट
नई दिल्ली| भारतीय पर्यटक इन दिनों अकेले यात्रा कर विश्व भर के नए स्थानों की तलाश के साथ इससे जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियां एकत्र कर रहे हैं। इस सर्वश्रेष्ठ अनुभव को पाने की तलाश में ये पारंपरिक पर्यटक की छवि से दूर निकल कर अकेले यात्रा आरंभ कर रहे हैं। देश-दुनिया की सैर के शौकीन तुषार अग्रवाल ने 2009 में अपनी दैनिक दिनचर्या से विराम लेने का फैसला किया, और उन्होंने विश्व मानचित्र उठा कर सोचा कि क्या लंदन से दिल्ली की यात्रा सड़क मार्ग से की जा सकती? उन्होंने इस पर लगातार काम किया और अप्रैल 2010 में अपनी अद्भुत यात्रा शुरू की।
उन्होंने स्पोर्ट्स यूटीलिटी व्हिकल (एसयूवी) से 51 दिन में यूरोप, मध्य एशिया, रूस, चीन/तिब्बत और नेपाल की 12,000 किलोमीटर की यात्रा की। इस यात्रा में उन्हें 1,571 लीटर पेट्रोल एवं डीजल का इस्तेमाल करना पड़ा। उन्होंने अपनी यात्रा को याद करते हुए कहा, "यह जीवन भर का अनुभव है। सड़क की यात्रा एक अनुभव लेकर आती है जो कि सांस्कृतिक रूप से समृद्ध होती है। आप स्थानीय लोगों से जुड़ते हैं, आप जोशपूर्ण संस्कृति देखते हैं और अच्छे व बुरे लोगों से मिलते हैं।"
तुषार के विपरीत अजय रेड्डी के अकेले भ्रमण करने की लालसा अनपेक्षित तरह से शुरू हुई और इसके अनपेक्षित लाभ मिले। बेंगलुरू में कार्पोरेट क्षेत्र में कार्यरत रेड्डी का सामना ट्विटर में एक तस्वीर से हुआ जिसमें देश के विश्व धरोहर को पहचानने की चुनौती दी गई थी। अन्य लोगों की तरह वह भी ताज महल, खजुराहो, एलोरा और कुछ अन्य स्थानों को ही पहचान पाए।
इसके बाद उन्होंने देश के 29 ऐसे स्थलों की यात्रा का फैसला किया और उनके मुताबिक, इनमें से कई जगह वह जा चुके हैं। भारत में जहां छुट्टियां पारिवारिक रिवाज है, वहीं अकेले यात्रा अनुभव प्राप्त करने के इच्छुक लोग करते हैं।
आर्कटिक क्षेत्र, लैटिन अमेरिका और मंगोलिया जैसे आकर्षक स्थलों में छुट्टियां बिताने का प्रबंध करने वाली ट्रैवल कोशंट के संस्थापक विक्रांत नाथ कहते हैं, "आज के युवा अपने लिए छुट्टियां चाहते हैं। वह परिवार के साथ वार्षिक छुट्टियों पर जाते हैं, लेकिन उनके अंदर का खोजी व्यवहार हमेशा कुछ नए स्थान की तलाश में रहता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













Click it and Unblock the Notifications