अखिलेश के राज में नहीं चल सकेंगे फर्जी वेब पोर्टल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर से अगर कोई फर्जी वेब पोर्टल चजा रहा है, तो अब उसकी खैर नहीं। क्योंकि बहुत जल्द अखिलेश यादव की सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ ऐक्शन लेने के मूड में है। असल में उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आईटी विजन को मूर्त रूप देने के लिए नई वेब नीति को अमली जामा पहनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। वेब पत्रकारिता से जुड़ी विशेषज्ञों की एक टीम इस पर होमवर्क कर रही है और सब कुछ सही रहा तो अगले कुछ महीनों में इस नीति को अमल में लाया जाएगा।
इस नीति के बन जाने के बाद जहां फर्जी वेब पोर्टलों पर लगाम लगायी जायेगी, वहीं सराकरी वेबसाइटों और विभिन्न समाचार संस्थानों द्वारा संचालित वेब न्यूज पोर्टलों का विकास किया जायेगा। इस संबंध में जल्द ही एक विज्ञापन भी जारी किया जाएगा। सरकार ने जो टीम बनायी है, उसकी बागडोर सूचना विभाग के निदेशक प्रभात मित्तल को सौंपी गई है। इस वेब नीति का निर्माण इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के एक कोर ग्रुप द्वारा उपनिदेशक डा. अशोक कुमार शर्मा की देखरेख में तैयार किया जा रहा है।

वेब नीत बन जाने के बाद उप्र इलेक्ट्रानिक कार्पोरेशन द्वारा इसका परीक्षण किया जाएगा और फिर इसे शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। नीति को मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार के पास एक अपनी वेब नीति भी होगी। इसके अंतर्गत सिर्फ वेब पत्रकारिता से जुड़े लोगों पर लगाम लगाने की नहीं है, बल्कि सरकारी विज्ञापन और सहायता वेब पोर्टलों को भी दिया जाए और उनके माध्यम से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाए।
वेब नीति की जरूरत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह नीति संस्थानों के आर्थिक विकास के लिए एक शसक्त माध्यम बनेगी और यह समाचार संस्थानों के हित में है और सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि इस नीति के बन जाने के बाद विज्ञापनों की पारदर्शिता बढ़ेगी और इसे अखबारों के पोर्टल पर भी दिखाना अनिवार्य होगा। वेब नीति बन जाने के बाद वेब पत्रकारिता से जुड़े पत्रकारों को भी सरकार मान्यता देगी और यह इससे जुड़े हुए लोगों के लिए खुशी की बात है।












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