अखिलेश की चोरी और सीनाजोरी, दुर्गा को ठहराया नकारा और नाकाबिल
लखनऊ। नोएडा की एसडीएम और आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के सस्पेंशन को लेकर खासा किरकिरी करा चुके अखिलेश यादव सरकार अब अपने फैसले पर अड़ गई है। अखिलेश सरकार ने दुर्गा शक्ति के निलंबन के फैसले पर दुर्गा को चार्जशीट सौंप दी है। चार्जशीट में बताया गया है कि दुर्गा शक्ति को क्यों निलंबित किया गया। अखिलेश सरकार ने अपने चार्जशीट में दुर्गा शक्ति की प्रशासनिक क्षमता और सूझबूझ पर सवालिया निशान उठाया है। सरकार ने दुर्गा शक्ति से 15 दिनों के अंदर चार्जशीट का जवाब मांगा है।
वहीं यूपी सरकार ने केंद्र को भी इस संबंध में जवाब भेज दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मेरठ कमिश्नर मंजीत सिंह की एलआईयू यानि लोकल इंटेलिजेंस यूनिट रिपोर्ट के आधार पर ये चार्जशीट दुर्गाशक्ति नागपाल को रविवार देर रात सौंप दी गई। मालूम हो कि दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को लेकर यूपी से लेकर दिल्ली तक की राजनीति गर्म है। यूपी सरकार पर दुर्गा शक्ति पर ही अलग-अलग आरोप लगा रही है। राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि नागपाल के खिलाफ कथित रूप से स्थानीय लोगों द्वारा कराई गई उन शिकायतों की भी जांच की जा रही है, जिनमें दुर्गा शक्ति पर सार्वजनिक जमीन के अतिक्रमण और दो निजी पार्टियों के बीच सौदा करवाने के आरोप लगाए गए हैं।
यूपी सरकार ने अपने चार्जशीट में दुर्गा शक्ति नागपाल पर 27 जुलाई को एक मस्जिद की दीवार गिराने का आदेश देकर सांप्रदायिक सदभाव को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। अपनी चार्जशीट में सरकार ने कहा है कि, रमजान के महीने में, जब सांप्रदायिक भावना काफी ज्यादा होती है, ऐसे में दुर्गा शक्ति नागपाल ने मस्जिद की दीवार को गिराने का आदेश दिया। चार्जशीट के मुताबिक, नागपाल का निर्णय गलत समय लिया गया और इसमें दूरदृष्टि का अभाव था। इसके अलावा चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि दुर्गा शक्ति ने यह दिखाया है कि उसमें प्रशासनिक सूझबूझ की कमी है।

चार्जशीट में दुर्गा पर लगे आरोप
चार्जशीट में दुर्गा पर आरोप लगाया गया है कि कादलपुर गांव में निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार के संबंध में किसी प्रकार के तनाव की कोई रिपोर्ट नहीं थी। मस्जिद का कोई भाग या कोई दीवार ग्राम समाज की भूमि पर निर्माणाधीन है इस बारे में कोई शिकायत नहीं थी। इसके बावजूद 27 जुलाई, 2013 को आप उस गांव में गईं और बिना किसी आवश्यकता और औचित्य के निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार को ध्वस्त कर दिया। ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जा या निर्माण हटाने की विधिक प्रक्रिया निर्धारित है, लेकिन मस्जिद की दीवार बिना विधिक प्रक्रिया का पालन किए ध्वस्त कराई गई। रमजान के महीने में इस कृ्त्य से क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द का वातावरण प्रभावित हुआ। ये असामायिक प्रशासनिक कार्रवाई अदूरदर्शिता और प्रशासनिक सूझबूझ का अभाव प्रदर्शित करती है।

15 दिन के भीतर दुर्गा को देना होगा जवाब
इन आरोपों पर दुर्गा शक्ति से 15 दिनों के भीतर जबाब मांगा गया है। इस बीच रविवार को मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी निवास पर इफ्तार की दावत दी, जिसमें उन्होंने पूरे मामले पर चुप्पी साधे रखी। लेकिन अपने मंत्री को आगे कर उन्होंने ये जरूर जता दिया कि वो झुकने के मूड में नहीं हैं। स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने कहा कि इस मसले पर विपक्ष भी सियासत कर रही है और अधिकारी भी सियासत कर रहे हैं। नागपाल का कोई मुद्दा नहीं था। ये जो नागपाल गई हैं, इससे ज्यादा कार्रवाई पिछले 6 महीने में हो चुकी है।

दुर्गा पर बोली सोनिया तो गुस्साए मुलायम
सूत्रों की मानें तो दुर्गा मामले में सोनिया के दखल से मुलायम सिंह यादव नाराज हो गए हैं। दुर्गा शक्ति नागपाल को निलंबित करने का फैसला मुलायम सिंह का ही था। सूत्रों के मुताबिक यूपी सरकार फिलहाल दुर्गा के निलंबन का फैसला वापस नहीं लेने जा रही है। यूपी सरकार ने इस मामले में केंद्रीय कर्मिक मंत्रालय की चिट्ठी का जवाब भी भेज दिया है। इस बीच एसपी नेता नरेंद्र भाटी जिन्होंने खुलेआम कहा था कि उन्होंने ही दुर्गा को निलंबित कराया था सारा ठीकरा एक बार फिर दुर्गाशक्ति पर फोड़ दिया।

इमानदारी की सजा दे रही है सपा: भाजपा
बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यूपी मे सपा की सरकार एक ईमानदार और होनहार को बिना गुनाह सजा दे रही है। सस्पेंशन वापस होने की जगह चार्जशीट थमा दिया है। भाजपा पहले से ही कह रही थी कि सैंड माफिया के खिलाफ लड़ रही थी उसे और बहाना से सस्पैंड किया गया। उसका सस्पेंशन वापस लेना चाहिए, ये हमें बर्दाश्त नहीं है।

दुर्गा शक्ति मामले में नियमों का पालन होगा: मनमोहन
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की निलंबित अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के मामले में नियमों का पालन किया जाएगा। दुर्गा शक्ति निलंबन मामले में सरकार के रुख पर एक मीडियाकर्मी द्वारा पूछे गए सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा, "यहां निर्धारित नियम हैं। उनका पालन होगा। हम इस मामले की विस्तृत जानकारी लेने के लिए राज्य सरकार के संपर्क में हैं।" वर्ष 2009 बैच की 28 वर्षीया आईएएस अधिकारी नागपाल का उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 29 जुलाई को निलंबन किए जाने के बाद से जनता में रोष देखा जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से नागपाल के लिए न्यायपूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कानून के पालन में तैनात अधिकारियों की सुरक्षा की जरूरत पर बल दिया।

बिना IAS के ही चला लेंगे यूपी: रामगोपाल यादव
मामले की जांच या फिर कार्रवाई करने की बात कहने की जगह पर सपा सरकार अलग ही राग अलाप रही है। सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव का कहना है कि अगर आईएएस मामलो में केंद्र सरकार दखलअंदाजी करता है तो उन्हें आईएएस अफसरों की जरूरत नहीं है। रामगोपाल वर्मा का कहना है कि वो बिना आईएएस अफसर के ही यूपी चला लेंगे।
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