नहीं खुलेगी पार्टियों की पोल, RTI के दायरे से बाहर होगे राजनीतिक दल

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नयी दिल्ली। सूचना के अधिकार नाम का हथियार लों के हाथों में थमाने वाली कांग्रेस सरकार खुद इसके जाल में फंस गई है। सरकार जानती है कि अगर राजनीतिक दलों को आरटाई का दायरे में लाया गया तो उनकी सारी पोल खुल जाएंगी। ऐसे में सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला करते हुए राजनीतिक दलों को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान करने वाले एक संशोधन विधेयक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आरटीआई संशोधन विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी । इस मुद्दे पर एक मसौदा नोट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने तैयार किया था।

दरअसल केन्द्रीय सूचना आयोग ने कहा था कि राष्ट्रीय दलों कांग्रेस, भाजपा, माकपा, भाकपा, बसपा और राकांपा को केन्द्र सरकार की ओर से परोक्ष रूप से काफी वित्तपोषण मिलता है, इसलिए उन्हें जन सूचना अधिकारियों की नियुक्ति करनी चाहिए, क्योंकि आरटीआई कानून के तहत उनका स्वरूप सार्वजनिक इकाई का है।

सीआईसी ने इन राजनीतिक दलों को जन सूचना अधिकारी और अपीली अधिकारी की नियुक्ति के लिए छह सप्ताह का समय दिया था। सीआईसी के इस फैसले के बाद पर राजनीतिक दलों ने स पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। खुद आरीआई कानून को लाने नाली कांग्रेस सरकार ने सीआईसी के इस फैसले का विरोध किया था और अब इस विधेयक को मंजूरी देकर सरकार ने राजनीतिक दलों को इससे बाहर कर दिया है।

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