यूपी सरकार को लिखी चिठ्ठी, तो मिलेगा यह जवाब
लखनऊ। अगर आप उत्तर प्रदेश में रह रहे हैं, तो आपको अखिलेश यादव की सरकार को कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं, यहां तक आप सरकार को चिठ्ठी तक नहीं लिख सकते। अगर आपने यह भूल की, तो आपको भी कड़क जवाब मिल सकते हैं, जिसमें पत्र नहीं लिखने की नसीहत भी हो सकती है।
जी हां ऐसा इसलिए क्योंकि लखनऊ की रहने वाली आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने जब सरकार को पत्र लिखा, तो उन्हें ऐसा ही जवाब मिला। नूतन ठाकुर ने बताया, "हाल में ही पत्राचार नहीं करने का आदेश उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह आर एम श्रीवास्तव ने अपने नोट में मेरे लिए किया। आरटीआई से प्राप्त सूचना के अनुसार श्रीवास्तव को मेरे द्वारा भेजे दो पत्र इतने नागवार लगे कि उन्होंने नोटशीट में लिख दिया कि ठाकुर को डीजीपी के माध्यम से परामर्श दे दिया जाए कि वे भविष्य में शासन से पत्राचार नहीं करें।"

नूतन ठाकुर ने बताया कि मुख्य सचिव जावेद उस्मानी प्रमुख सचिव गृह की इस बात से सहमत नहीं हुए और उन्होंने आदेश किया कि इसकी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया, "मैंने अपने पति आईपीएस अमिताभ ठाकुर के सन्दर्भों का हवाला देते हुए मुख्य सचिव को दो पत्र भेजे थे, जिनमे शासन स्तर पर आईपीएस अधिकारियों के विभागीय जांच और पदोन्नति में कतिपय गडबडियों की जांच कराने की बात कही थी। जांच की बात तो दूर, श्रीवास्तव ने मुझ को ही अवसादग्रस्त बताते हुए पत्राचार की मनाही तक की बात कह दी, वह भी अपने द्वारा नहीं, डीजीपी द्वारा जबकि ना उन्हें, ना डीजीपी को ऐसा आदेश करने का कोई विधिक अधिकार है।"
नूतन ठाकुर ने यूपी सरकार से सवाल किया है कि क्या कोई सरकारी अफसर किसी गैर-सरकारी व्यक्ति को सरकार से पत्राचार करने से रोक सकता है? हमारे देश के किसी भी क़ानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन तो क्या आईएएस अफसर क़ानून से भी ऊपर होते हैं?












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