फूड फॉर वोट! कैबिनेट की झंडी के बाद, अब राष्ट्रपति देंगे मंजूरी

Cabinet clears Ordinance to implement Food Security Bill
नयी दिल्ली। यूपीए सरकार और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी की ड्रीम प्रोजेक्ट खाद्य सुरक्षा को कैबिनेट से हरी झंडी मिल गई है। भ्रष्टाचार और घोटालों से डूबी कांग्रेस सरकार के पास इस बार लोगों से वोट मांगने के लिए कोई मुद्दा नहीं है। ऐसे में सरकार चाहती है कि फूड सिक्योरिटी बिल के जरिए गरीबों को सस्ता अनाज देकर वोट मांगते है।

फूड सिक्योरिटी अध्यादेश को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब अध्यादेश को सीधे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति से हरी झंडी मिलने के बाद ये अध्यादेश लागू हो जाएगा।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की मंजूरी मिलने के 6 महीने के अंदर सरकार को इसे बिल को संसद में पास करवाना होगा। दरअसल विरोधियों के साथ-साथ सहयोगी दलों भी सरकार की इस नीति का विरोध कर रहे है। उनकी मांग है कि सरकार इस बिल पर पहले संसद में चर्चा कराएं। उसके बाद बिल को मंजूरी दी जाए।

सरकार के इस बिल का उद्देश्य भारत के 1.2 अरब लोगों में से 67 फीसदी लोगों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत गरीबों को 3 रु किलो चावल और 2 रु किलो गेहूं मिलेगा और करीब 80 करोड़ लोगों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार पर करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये का भार पड़ेगा।

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