छत्तीसगढ़ में मिले ऐतिहासिक शैलचित्र

कोरबा जिले के करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खुंटाकुड़ा के धवईभांठा मोहल्ले के सुअरलोट के पहाड़ी क्षेत्र में हरिसिंह क्षत्री ने इससे पहले 8 नवंबर 2012 को सर्वप्रथम शैलचित्रों की खोज की थी। इन शैलचित्रों की संख्या पांच थी, जिनमें स्त्री.पुरूषों की आकृतियां क्रमश: 14 और 19 अंगुल है। इसके अलावा पशुओं की आकृतियां भी मिली थी, जिसकी पुष्टि राष्ट्रीय संगोष्ठी में क्षत्री के शोधपत्र वाचन के दौरान किया गया। इन शैल चित्रों को ऐतिहासिक काल का माना गया है।
उत्साहित हरिसिंह क्षत्री ने एक दल बनाकर सुअरलोट की पहाड़ी पर फिर इस वर्ष 22 मई को अन्वेषण कार्य किया। उन्हें सुअरलोट पहाड़ के सीता चौकी नामक पहाड़ी कंदरा की दीवार पर पुन: शैलचित्रों की एक श्रृंखला मिली। इस श्रृंखला को देखकर वह खुशी से हतप्रभ हो गए। उन्होंने प्रसिद्ध पुरातत्वविद् स्वर्गीय रायबहादुर हीरालाल साहब के शोध आलेख का अध्ययन किया जिसमें उन्होंने इस क्षेत्र को रामायणकालीन सीताहरण का स्थल होने का विचार अपने शोध आलेख में लिखा था।
इस परिकल्पना को स्व. पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय, पं. प्रयागदत्त शुक्ल व स्व. प्यारेलाल गुप्त जैसे विद्वानों ने प्रमाण प्रस्तुत करने कहा था। प्रमाण के अभाव में स्व. रायबहादुर की बात काट दी गई थी। इसका प्रमाण अब 2013 में कोरबा जिला पुरातत्व संग्रहालय में पदस्थ मार्गदर्शक ने अपने खोज से देने का प्रयास किया है।
सुअरलोट के इस सीता चौकी में जो चित्र बने हैं, वह सबसे पहले दो हिरण, फिर कुटियानुमा डिजाइन, फिर एक चौकौर में विमाननुमा आकृति बनी हुई है। इसको डिकोड कर पुष्टि के लिए उन्होंने पुरातत्व अधीक्षक, भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण मंडल रायपुर, संचालक संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, रायपुर तथा रॉक आर्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के सचिव एवं संपादक जी.एल.बादाम को भेजा। इनके चित्रों की आकृति को देखकर शैलचित्रों की पुष्टि भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग के असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट ने कर दी है।
रॉक आर्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के सचिव एवं संपादक ने इसे भारत देश में प्राप्त होने वाले शैलचित्रों में विमान होने की अब तक की पहली खोज होने की बात कहकर इस खोज के लिए हरिसिंह क्षत्री को बधाई भेजा है।












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