नैनीताल का वैभव आखिर लौटे तो कैसे?
नैनीताल। देश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसके पुराने सौंदर्य, गौरवशाली वैभव तथा आकर्षण को लौटाने को लेकर उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी ने भी चिंता प्रकट की है। सवाल यह है कि संकट के बादल छंटे तो आखिर कैसे?
राज्यपाल कुरैशी ने गत शुक्रवार को नैनीताल में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कहा, "शहर के प्रबुद्ध जागरूक नागरिकों को अपने दायित्वों के प्रति सजग होकर प्रशासन का साथ देना होगा। शहर के स्वरूप व अस्तित्व को खतरे में डालने वाली अव्यवस्थाओं के खिलाफ खड़े होने के लिए जिम्मेदार नागरिकों को एक समिति गठित कर शहर की प्रत्येक गतिविधि की समीक्षा करनी होगी।" उन्होंने दो टूक कहा कि शहर के हरित क्षेत्र तथा नालों के ऊपर हुए अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त किया जाना चाहिए।
यह बैठक कुरैशी के पहल पर ही आयोजित की गई, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों सहित शहर के विभिन्न महत्वपूर्ण संगठनों, संस्थाओं के प्रतिनिधियों, प्रबुद्ध व जागरूक नागरिकों को आमंत्रित किया गया था, ताकि वस्तुस्थिति से अवगत होते हुए महत्वपूर्ण सुझावों के अनुरूप एक सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार की जा सके।
बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई कि कचरा, मलबा और अनेक प्रकार के प्रदूषणों, अवैध निर्माणों एवं अनियंत्रित यातायात के दबाव में अपने अस्तित्व के लिए कराह रहे नैनीताल शहर को बचाने के लिए क्या किया जाना चाहिए।
बैठक में झील में बढ़ रहे मलबा-कचरा सहित अन्य प्रदूषण, हरित क्षेत्र तथा झील के कैचमैंट एरिया पर हो रहे अवैध निर्माण के कारण सूख रहे प्राकृतिक जल स्रोतों, शहर में निरंतर हो रहे अवैध निर्माण, जलप्रवाह प्रणाली में सुधार, अनियंत्रित यातायात व्यवस्था तथा पार्किं ग जैसी समस्याओं के अतिरिक्त बलिया-नाला क्षेत्र के उपचार पर भी चिंता व्यक्त की गई।
समस्याओं के साथ ही इनके निवारण के लिए भी कई महत्वपूर्ण सुझाव पेश किए गए, जिसके अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्र शहर समिति के पुर्नगठन, नैनीझील के जलस्रोत का आधार 'सूखाताल' को पुनर्जीवन देने के लिए उसे पूर्णत: झील में परिवर्तित करने, हरित क्षेत्र व असुरक्षित घोषित क्षेत्र सहित शहर में सभी नए निर्माणों को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने, मरम्मत संबंधी कार्यो की आड़ में होने वाले अवैध निर्माण को रोकने के लिए अनुश्रवण समिति के गठन तथा अनियंत्रित यातायात को रोकने तथा पार्किं ग व्यवस्था के लिए वैकल्पिक उपायों की कार्ययोजना तैयार करने जैसे कई महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे गए।
नैनीताल शहर के अस्तित्व पर प्रबुद्ध नागरिकों का कहना था कि सभी सर्वेक्षणों से यह स्पष्ट हो चुका है कि नैनीताल शहर में अब सभी प्रकार के दबाव सहने की क्षमता समाप्त हो चुकी है, इसलिए इस शहर पर अब किसी भी प्रकार का दबाव न डाला जाए। बैठक में इस बात पर आम सहमति दिखाई दी कि नगरपालिका को अधिक सशक्त किया जाए और शहर के विकास की विभिन्न गतिविधियों में नगर पालिका के चुने हुए प्रतिनिधियों की राय अवश्य ली जाए। इसके अलावा बैठक में शहर के सुनियोजित विकास के लिए गठित झील विकास प्राधिकरण को उद्देश्यों के क्रियान्वयन में पूर्णत: असफल बताया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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