मुंबई की कई इमारतों की नींव पर कील ठोंकती मौत

ठाणे। मुंबई से लगे ठाणे में गुरुवार की रात बारिश ने अपना कहर एक 35 साल पुरानी इमारत पर बरपाया। इसमें दो बच्‍चों समेत सात लोगों की मौत हो गई और मध्‍य रात्रि शुरू हुआ मलबा हटाने का काम अभी तक जारी है। मृतकों की संख्‍या बढ़ भी सकती है। मुंब्रा इलाके की इस खबर ने किसी को दहलाया हो या नहीं, उन लोगों के दिल में डर जरूर बैठा दिया होगा, जो ऐसी ही कमजोर या मानकों के विपरीत बनीं इमारतों में रह रहे हैं।

जी हां मुंबई में कई इमारतें ऐसी हैं, जिनकी नींव के अंदर मौत हर रोज़ कील ठोंकने आती है। खास तौर से तब जब मुंबई में भारी बारिश हो रही होती है। यानी जून से लेकर सितंबर तक। जी हां मुंबई में इन्‍हीं महीनों में जमकर बारिश होती है और यही कारण है कि यहां की अधिकांश इमारतों में सीलन की समस्‍या हमेशा बनी रहती है और नींव दिन प्रति दिन कमजोर पड़ती जाती हैं।

मुंबई के निवासी आनंद सक्‍सेना से बात की तो उन्‍होंने बताया कि मुंब्रा की इमारत के गिरने का सबसे बड़ा कारण उसके रख-रखाव पर ध्‍यान नहीं देना था। उन्‍होंने बताया कि आर्थिक राजधानी में हजारों चॉल ऐसी हैं, जो कब गिर जायें, कुछ पता नहीं। ऐसी इमारतें सबसे ज्‍यादा मुंब्रा, कुर्ला, भिंडी बाजार, दादर, नागपाड़ा, घाटकोपर, कल्‍यान, मुलुंड, परेल और साकीनाका के कई इलाकों में देखी जा सकती हैं। घनी आबादी वाले इन इलाकों में अधिकांश लोग मजदूर वर्ग के हैं, जो यहां काम करने आते हैं और छोटी-छोटी खोली लेकर रहते हैं। ये लोग किराये पर रहते हैं इसलिये बिल्डिंग के रखरखाव से उन्‍हें कोई मतलब नहीं रहता और बिल्डिंग का मालिक अलग जगह बने आलीशान फ्लैट में रहते हैं। हालांकि कई इलाके ऐसे हैं, जैसे वाशी, कोलाबा, मुलुंड, पवई, आदि, जहां पुरानी इमारतों को गिरा कर नई इमारतों के बनाने का काम किया जा रहा है। यह तरीका सुरक्षित है और विकास की दृष्टि से अच्‍छा भी।

खैर मुंब्रा में रात दो बजे हुए हादसे में मरने वालों में एक तीन महीने के शिशु और एक सात साल के बच्चा है। शुक्रवार सुबह तक 22 लोगों को निकाला गया। अभी भी कईयों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। इस इमारत में रहने वालों को नगर निगम ने कुछ समय पहले बिल्डिंग खाली करने का नोटिस दिया था। लेकिन उस नोटिस में किसी को मौत नज़र नहीं आयी।

किसी भी इमारत के ढहने के पांच कारण-

पहला कारण

पहला कारण

वास्‍तुविद किशु रस्‍तोगी का कहना है कि कोई भी इमारत तब कमजोर पड़ जाती है, जब उसका निर्माण मिट्टी की जांच किये बिना करवा दिया जाता है।

दूसरा कारण

दूसरा कारण

इमारत से सटा हुआ अगर कोई बड़ा नाला है या आस-पास जलभराव हो जाता है, तो इमारत के गिरने की आशंका बढ़ जाती है, क्‍योंकि जमीन के रास्‍ते वही पानी इमारत की नींव में भर जाता है।

तीसरा कारण

तीसरा कारण

जब किसी इमारत का परमिट 3 मंजिल का होता है, तो उसकी नींव भी उसी के हिसाब से बनायी जाती है। अगर पैसे के लालच में कोई तीन की चार मंजिल कर देता है, तो उसका सीधा प्रभाव नींव पर पड़ता है, जो आगे चलकर इमारत के गिरने का कारण बनता है।

चौथा कारण

चौथा कारण

पानी की टंकी, सिर्फ छत के ऊपर होनी चाहिये, वो भी वॉटरप्रूफिंग के साथ। लेकिन मुंबई-पुणे की अधिकांश इमारतों में पानी की टंकियों का निर्माण हर मंजिल पर बने बाथरूम के ऊपर किया जाता है, जो साल भर तक सीलन का कारण बना रहता है।

पांचवां कारण

पांचवां कारण

इमारत का सही रखरखाव नहीं करने और मानकों के विपरीत बनाने से भी ऐसे हादसे होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। मुंबई की बात करें तो यहां हजारों इमारतों का निर्माण नियमों को दरकिनार कर किया गया है।

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