Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

भारत-जापान की दोस्‍ती से क्‍यों बौखलाया चीनी ड्रैगन?

[नवीन निगम] विश्व में यदि कूटनीति का नोबेल पुरस्कार मिल रहा होता तो निश्चित मानिए इस बार का पुरस्कार भारत के पास ही जाता। भारत ने चीन के साथ अपने बरसों पुराने सीमा विवाद को जिस प्रकार विश्व राजनीति में भुनाया है उसका कोई जवाब नहीं। उसने चीन को अपने बाजार का मूल्य समझाया और जापान की चीन के प्रति संवेदनशीलता को भी अपने पक्ष में यह कहते मोड़ लिया कि उसका चीन पर कतई विश्वास नहीं है और वह अपने यहां बुनियादी निर्माण योजनाओं में चीन को नहीं, जापान को साझीदार बनाना चाहता है। मैंने कई बार लिखा है कि दूसरा विश्व युद्ध इसलिए हुआ क्योंकि जर्मनी, जापान और इटली के पास बाजार नहीं था और इंगलैंड और फ्रांस के पास था।

आज भी हर देश के लिए बाजार ज्यादा महत्वपूर्ण है न कि जमीन को छोटा सा टुकड़ा। चीन इस समय भारत की इस कूटनीति पर लगभग खीज सा गया है, लेकिन अर्थशास्त्र की राजनीति की इस विडम्बना को समझिए कि चीन की इस खीज का कारण है भारत लेकिन वह भारत को जानते हुए भी नाराज नहीं कर सकता। उसके सरकारी अखबार इन सब बातों के लिए जापान को, उसके प्रधानमंत्री को, अमेरिका और आस्ट्रेलिया को लगभग गाली दे रहे है लेकिन भारत के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल रहे है क्योंकि भारत के बाजार को वह नाराज नहीं कर सकते 50 अरब डॉलर के व्यापार को कोई कैसे नाराज कर सकता हैं।

आइये एक नजर डाले चीन के सरकारी अखाबरों के लेखन पर। चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र (द पीपुल्स डेली) ने मंगलवार को लिखा, इंडिया के लिए बुद्धिमानी इसी में है कि वह चीन के साथ अपने विवादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उकसावे से प्रभावित हुए बिना शांतिपूर्ण ढंग से निपटाए। अखबार ने जापानी राजनेताओं की आलोचना की हैं। अखबार में रिश्ते उतने खराब नहीं हेडिंग वाले लेख में कहा गया है, चीनी पीएम की यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बढ़ा चढ़ाकर पेश किया। ऐसा लगा मानो चीन-भारत के संबंध अचानक से तनावपूर्ण हो गए हों। लेकिन मीडिया को इसने आश्चर्यचकित कर दिया कि चीन और भारत ने थोड़े से वक्त में ही मुद्दे का उचित समाधान निकाल लिया। अखबार के मुताबिक, चीन-भारत संबंधों में कई मतभेद और विरोधाभास हैं। कुछ देश इन मतभेदों को फूट बढ़ाने के मौके के तौर पर देखते हैं।

जापान के पीएम शिंजो एबे ने अपील की थी कि चीन से मुकाबला करने के लिए जापान, इंडिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका को मिलकर एक डेमोकैटिक सिक्युरिटी डायमंड बनाना चाहिए। इस बयान का हवाला देते हुए अखबार ने लिखा है, कुछ राजनेता चीन से जुड़े मुद्दों पर खुद को तुच्छ चोर साबित कर रहे हैं। डेमोकैटिक सिक्युरिटी डायमंड बनाए जाने की अपील से जापान की तुच्छ स्तर की कूटनीति बयान होती है। अखबार के मुताबिक, इन चोरों की ऐसी साजिश सफल होने वाली नहीं है। पीपुल्स डेली के सहयोगी ग्लोबल टाइम्स ने उन रिपोर्टो को प्रमुखता दी है जिनमें भारत-जापान के बीच यूएस-2 टोही विमानों के सौदे पर दस्तखत होने की उम्मीद की गई है।

अब भारतीय मीडिया को समझ में आ जाना चाहिए कि चीन आज उस हालत में नहीं है कि वह भारत को आंख दिखा सके। उल्टे भारत ही चीनी घुसपैठ को विश्व में भुनाने में लगा है, चीन की कोई भी नासमझी भारत को जापान, आस्ट्रेलिया और अमेरिका (जो पहले से ही एक है) के प्रस्ताव पर हामी भरवा सकती है, लेकिन भारत अपनी इसी कूटनीति पर कायम रहा तो वह दिन दूर नहीं जब चीन खुद भारत से जल्द से जल्द सीमा विवाद हल कर लेने के लिए कहेगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+