690, 691 और 692 की वजह से छटपटा रहा चीनी ड्रैगन!
[नवीन निगम] चीन अब भारत में घुसपैठ के बाद उपजे रोष को शांत करने की कवायद में जुट गया है। मैं पहले भी लिख चुका हूं कि इतिहास में दो विश्व युद्ध सिर्फ इसलिए हुए कि ब्रिटेन और फ्रांस के पास कई बाजार थे, जबकि जर्मनी, जापान और इटली के पास बाजार नहीं थे। चीन के लिए भारत का बाजार ज्यादा महत्वपूर्ण है न कि उसकी 20 किमी. की जमीन। चीन के प्रधानमंत्री यूं ही नहीं भारत की यात्रा पर आ रहे है।
वह भारत के बाजार में और हिस्सा चाहते हैं, लेकिन चीन ने जो घुसपैठ की उसके बाद भारत में चीन के उत्पादों की सेल में जो गिरावट देखी जा रही है। उससे ड्रैगन चिंतित हो गया है और वह इस पर जल्द नियंत्रण करना चाहता है। भारत की सोशल साइटों ने चीन के उत्पादों की सेल पर विपरीत असर डाल दिया है। लखनऊ में इलेक्ट्रानिक के उत्पाद के एक बड़े शोरूम में आजकल लोग उत्पाद लेने के समय यह देखने में लगे रहते है कि जो चीज वो ले रहे है वो कही चीन में तो नहीं बनी है।

सोशल साइटों के जरिए जब से लोगों को यह पता चला है कि हर उत्पाद के नीचे कंप्यूटर से लिखे अंकों की शुरुआत यदि 690, 691 और 692 से है तो समझ जाएं कि इस उत्पाद का पैसा चीन जाने वाला है और जिसमें 890 लिखा होता है उसका पैसा भारत में ही रहेगा। तबसे चीन के उत्पादों की बिक्री पर विपरीत असर पड़ रहा है। क्योंकि हर उत्पाद पर यह नहीं लिखा होता कि यह बना कहां है लेकिन नम्बर पढऩे के बाद लोग आसानी से समझ ले रहे है कि 690, 691 और 692 से शुरू होने वाले नम्बर मॉल चीन में बने होने की बात कहते है।
लोग चीन के उत्पादों खासतौर पर मोबाइल खरीदने में इस नम्बर को ध्यान से पढ़ रहे है। चीन को लगातार इस तरह की सूचानाएं मिल रही है और चीन भारत में उपजे इस रोष को कम करने की कवायद में जुट गया है। इसीलिए प्रधानमंत्री ली क्विंग की भारत यात्रा से पहले चीन ने लद्दाख में हाल ही में हुए सीमा विवाद को दरकिनार करते हुए गुरुवार को कहा कि दोनों पक्षों के पास ऐसे मसलों का प्रभाव आपसी संबंधों पर पडऩे से रोकने की क्षमता है। चीन के उप विदेश मंत्री सोंग ताओ ने कहा कि आपसी मतभेदों की तुलना में हमारे आपसी हित ज्यादा हैं।
हमारे बीच स्पर्धा से ज्यादा सहयोग है। हमारे पास यह योग्यता है कि हम इन मतभेदों का असर अपने रिश्तों के विकास पर पडऩे से रोक सकें। पुरानी सभ्यताएं और उभरते बाजार होने के अलावा दोनों देशों के पास अपने मतभेदों को सही ढंग से निपटाने की समझदारी और क्षमता है। ली द्वारा यात्रा के लिए भारत को पहली विदेश यात्रा के लिए चुनना यह दर्शाता है कि नई सरकार के लिए चीन-भारत संबंध कितना महत्व रखते हैं। ज्ञात हो कि नई दिल्ली और मुंबई के लिए ली की यात्रा 19 मई से शुरू हो रही है।
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