अपने ब्राह्मण-अस्त्र का इस्तेमाल नहीं कर पा रही सपा
लखनऊ (नवीन निगम)। हनुमान जी को अपनी शक्ति के बारे में तब तक ज्ञान नहीं हुआ जबतक जामवंत ने उन्हें उनकी शक्ति के बारे में नहीं बताया। उत्तर प्रदेश में राज कर रही समाजवादी पार्टी की स्थिति भी यही है ब्राह्माणों को पटाने के लिए वह उन हथियारों का इस्तेमाल कर रही है जो हथियार उसकी विरोधी पार्टी बसपा चला रही है जैसे परशुराम सम्मेलन और सभा करके। उसे पता ही नहीं कि उसके पास ऐसे दो हथियार है जिसकी काट न बसपा के पास है न भाजपा और कांग्रेस के पास। पहला हथियार है प्रमोशन में आरक्षण और दूसरा है गांव में एससी-एसटी के फर्जी मुकदमें।
सपा को परशुराम जयंती या कुछ और करने की जरुरत नहीं है उसे तो बस यह दो बातें सवर्ण खासतौर पर ब्राह्माण समाज को याद दिलानी है। जैसे प्रमोशन में आरक्षण के विषय पर अन्य पार्टियों की क्या राय थी और सपा ही एक मात्र पार्टी थी जिसने इसका विरोध किया था। ब्राह्माण और अन्य सवर्ण जातियों को जैसे ही यह याद आएगा कि उनके बच्चों के भविष्य को तो सपा ने ही बचाया है वह तुरंत बात समझ जाएंगे। नहीं तो परशुराम के नाम पर माला चढ़ाने से कौन सा ब्राह्माण भाजपा में वोट डालने नहीं जाएगा। लेकिन जब उन्हें याद दिलाया जाएगा कि उनके बच्चों के भविष्य के बारे में भाजपा और कांग्रेस जैसे दल जो अपने को ब्राह्माणों का सबसे बड़ा सरंक्षक समझते है, ने भी ध्यान नहीं दिया तो बात लोगों के गले के नीचे उतर सकती है और कांग्रेस और भाजपा के अलावा बसपा को भी लोगों के बीच जवाब देते नहीं बनेगा।
इसके अलावा गांवों में बसपा शासनकाल में किस प्रकार लोगों को एससी-एसटी के फर्जी मुकदमों में फंसाया गया यदि सपा लोगों को यह याद दिलाएंगी तो उसे वह जनादेश फिर मिल सकता है जिसके दम पर वह 2012 में सत्ता में आई थी।

उधर लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेश दीक्षित ने कहा है कि हर ब्राह्माण का सम्मान व स्वाभिमान समाजवादी पार्टी में ही सुरक्षित है। कोई चाहे जितनी भी कोशिश कर ले ब्राह्माण मुलायम सिंह यादव का साथ नहीं छोड़ेगा। यह सिर्फ कहने से नहीं होगा। सपा को लोगों को बहुत कुछ याद कराना होगा और यह भी बार-बार, क्योंकि सपा को भूलना नहीं चाहिए कि ब्राह्माण समाज भी सपा को एक मुस्लिम परस्त पार्टी के रूप में देखता है। इसलिए सपा ब्राह्माण समाज के भीतर जगह तभी बना पाएंगी जब वह उनके हितों के सरंक्षक के रूप में अपने को दिखाएंगी।












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