वरुण गांधी तो नहीं भाजपा के अगले CM कैंडिडेट
लखनऊ (नवीन निगम)। यूपी में भाजपा अचानक वरुण गांधी को आगे लाने में क्यों लग गई है। शायद मैं इस बात को जल्दी लिख रहा हूं लेकिन उत्तर प्रद्रेश में जिस प्रकार मोदी को पीएम पद का प्रत्याशी घोषित करने की मांग चल रही है उसी प्रकार भाजपा के लगता है कि वरुण गांधी के रुप में उसे प्रदेश में एक ऐसा नेता हासिल होने वाला है जो भाजपा को प्रदेश में ठीक उसी प्रकार सफलता दिला सकता है जिस प्रकार कभी भाजपा की नैया कल्याण सिंह पार लगाया करते थे।
इसी लिए भाजपा उन्हें गांधी परिवार खासतौर पर संजय गांधी की सीट पर लोकसभा चुनाव लड़वाना चाहती है। पिछले दिनों भाजपा के आम कार्यकर्ताओं से मैंने जब पूछा कि 2014 का लोकसभा चुनाव तो मोदी के नेतृत्व में आप लडऩा चाहते है लेकिन 2017 का विधानसभा किसके आसरे से लड़ोगे, तो एक साथ उन युवकों ने जिस व्यक्ति का नाम लिया तो वह और कोई नहीं वरुण गांधी थे। जब से मुलायम ने अखिलेश को यूपी का सीएम बनाया है अन्य पार्टियों को यह लगने लगा है कि उन्हें भी अब सीएम पद का उम्मीदवार कोई युवा व्यक्ति ही बनाना होगा।
भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच वरुण गांधी की छवि एक तेज तर्रार हिंदू नेता की है और भाजपा को यही छवि प्रदेश में वोट दिला सकती है। एक कार्यकर्ता का तो कहना था कि वरुण यदि आगे आते है तो कांग्रेस के वोट को भी हम आसानी से काट सकेंगे। क्योंकि वो संजय गांधी के पुत्र है। भाजपा के प्रदेश स्तर के नेता भी प्रदेश भाजपा में उठ रही इस नई लहर को शायद पहचान रहे है। तभी ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी की रिपोर्ट के खिलाफ राज्य मुख्यालय पर चार मई को होने वाले धरने का नेतृत्व राष्ट्रीय महासचिव वरुण गांधी करेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि यूपीए सरकार भ्रष्टाचार व घोटालों को दबाने के लिए सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग लगातार कर रही है। भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को अब संसद से जनता के बीच ले जायेगी। केंद्र के घपले-घोटालों के लिए सपा व बसपा भी बराबर की जिम्मेदार हैं। इन मुद्दों को लेकर ही चार मई को दीनदयाल स्मृतिका में धरना होगा।













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