मायावती ने फिर फेंका सवर्णों पर आरक्षण का पासा

मायावती जानती हैं कि अकेले दलित वोट उन्हें सत्ता नहीं दिला सकते लेकिन वह यह नहीं जानती की आरक्षण ऐसी तलवार हैं जो वोट को काट फेंकती हैं। याद करिए कि 1989 में वीपी सिंह को सत्ता में लाने वाले युवा ही थे जो भष्ट्राचार के खिलाफ उनका साथ देने निकले थे लेकिन वीपी सिंह ने देवीलाल से बचने के लिए जैसे ही मंडल का मुद्दा उछाला यही सवर्ण युवा वर्ग उनके खिलाफ हो गया। मायावती यदि प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे को हवा न देती तो सपा की मुस्लिम नीतिसे नाराज हिंदू सवर्ण वोट उनकी झोली में फिर जा गिरता।
लेकिन प्रमोशन में आरक्षण पर जोर देकर उन्होंने दलित वोट को तो अपने पर रिजर्व कर लिया लेकिन इस बात ने सवर्णों को हमेशा के लिए बसपा से दूर कर दिया।
ब्राह्मण सम्मेलन में आज मायावती ने पार्टी के हर कार्यकर्ता को लोकसभा चुनाव के लिए तैयार रहने का निर्देश देने के साथ ही कहा कि हमारी पार्टी सर्वसमाज के हितों का ध्यान रखती है और आगे भी इसी तर्ज पर काम करेगी। उन्होंने आज 36 लोकसभा प्रत्याशियों के नाम की घोषणा भी की। साथ ही उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तथा राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा तथा अन्य सभी प्रभारियों को चुनाव की तैयारी शुरू करने के निर्देश भी दिए।












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