जदयू के लिए नुकसानदायक होगी एनडीए से दुश्‍मनी?

पटना (मनोज पाठक )। बिहार में सतारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में गठबंधन टूटने की संभावना बनी हुई है। राजनीतिक चिंतक जहां इसे जल्दबाजी और जद(यू) के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं, वहीं जद(यू) के रणनीतिकार इस सम्भावित स्थिति को कहीं ज्यादा लाभकारी बता रहे हैं।

17 वर्ष पुराना गठबंधन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर खतरे में है। गठबंधन की बड़ी पार्टी होने के कारण प्रधानमंत्री का उम्मीदवार भाजपा का ही होगा, यह तय है। परंतु अभी तक उम्मीदवार का नाम तय नहीं है। दोनों दल गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। भाजपा के नेता कहते हैं अभी तो नाम ही तय नहीं हुआ है, फिर जद(यू) को भाजपा के किसी नेता को बदनाम करने की आवश्यकता क्या थी।

Nitish Kumar

बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि दिल्ली में जद(यू) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नरेन्द्र मोदी का नाम लिए बगैर उनकी आलोचना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में दुख है। दूसरी ओर जद(यू) के नेता कहते हैं कि अपनी बात रख दी है, जो करना है वह भाजपा को करना है। जद(यू) सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने मंगलवार को यह कहकर माहौल को और गरमा दिया कि वे भाजपा को बांधकर नहीं रखे हैं और न पैर ही पकड़े हैं।

राजनीतिक चिंतकों का मानना है कि गठबंधन टूटता है तो इसका खामियाजा दोनों दलों को भुगतना होगा, परंतु ज्यादा नुकसान जद (यू) को होगा। पटना के वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश्वर कहते हैं कि बिहार में 17 प्रतिशत मुसलमान मतदाता हैं। मोदी के मुद्दे पर जद (यू) का भाजपा से अलगाव मुसलमानों को जद (यू) अवश्य जोड़ेगा, परंतु ऊंची जातियों का वोट बिदक जाएगा। यही नहीं सरकार विरोधी वोट भी जद (यू) से अलग होकर भाजपा में चला जाएगा। ऐसे में जद (यू) के लिए गठबंधन से अलग होना आत्मघाती कदम होगा।

एक अन्य राजनीतिक चिंतक गंगा प्रसाद कहते हैं कि नीतीश राजग से अलग होते हैं तो उन्हें किसी न किसी दल से गठबंधन करना ही होगा, चाहे वह कांग्रेस ही क्यों न हो। गठबंधन नहीं करेंगे तो उनका राजनैतिक समीकरण बेडरूम तक सिमट जाएगा। भाजपा को भी इसका नुकसान तय है और इस स्थिति में लालू प्रसाद मजबूत होकर उभरेंगे, क्योंकि उनका जनाधार अभी कम नहीं हुआ है।

प्रसाद कहते हैं इस स्थिति में भाजपा आक्रामक राजनीति करेगी और उसका फायदा कम से कम बिहार में मिलना तय होगा। वह कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी का क्रेज युवाओं में है, फिर वह पिछड़े वर्ग से हैं, और पिछड़े वर्ग के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाने से रोकने की बात भाजपा गांव-गांव तक पहुंचा दी तो नीतीश की स्थिति माया मिले न राम वाली हो जाएगी। लेकिन जद (यू) के रणनीतिकार इस तर्क को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि जद (यू) ने पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, बालिका साइकिल योजना सहित महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू कर महिला वर्ग को खुश करने का प्रयास किया है। इसी तरह 21 अत्यंत पिछड़ी और अनुसूचित जातियों को मिलाकर महादलित परिवार की श्रेणी में लाकर उनके उत्थान की कई योजनाएं सरजमीं पर उतारी है।

रणनीतिकारों का कहना है कि सवर्णो के मामले में भी जद(यू) ने सरकार में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है, जिसके कारण वे पार्टी को नकार दें। भूमिहार पार्टी समीकरण में पहले से हैं, और मिथिलांचल में संजय झा को आजमाया जा रहा है। इसके अलावा एक बार फिर वशिष्ठ नारायण सिंह को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर राजपूत वर्ग को भी पार्टी ने अपने पक्ष में लाने का प्रयास किया है। जद (यू) खेमे का मानना है कि अगर राजग टूटता है तो उनकी सेहत पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। बिहार के सवर्णो के मन से अभी भी लालू के शासन का खौफ नहीं निकला है। इसलिए वे जद (यू) के अलावा शायद ही किसी दल को वोट दें। ऐसे में सवर्णो, महादलितों और मुसलमानों की यह तिकड़ी जद (यू) के लिए कहीं ज्यादा लाभकारी साबित हो सकती है। वैसे जद (यू) की यह भी कोशिश रही है कि कांग्रेस का राजद और लोजपा से गठबंधन न हो पाए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि ऐसा कर मतों का ध्रुवीकरण रोका जा सकेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+