अष्ठमी को ‘विवादित आसन’ में विराजमान होंगी मां विध्यवासिनी!

बांदा। आम लोगों को छोडि़ए, इस युग में देवी-देवता भी विवादों से अछूते नहीं हैं। विवाद होना लाजमी भी है, क्योंकि मठ-मन्दिरों से हर साल लाखों रुपए की आमदनी जो होती है। कुछ ऐसे ही त्रिकोणीय विवाद में इस साल बुंदेलखंड़ के बांदा जिले के श्रापित खत्री पहाड़ में विराजमान मां विंध्यवासिनी फंस गयी हैं, इस विवाद की वजह से देवी मां अब की बार अष्ठमी तिथि को ‘विवादित आसन' में विराजमान होकर अपने श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी करेंगी।

बुंदेलखंड़ में बांदा जिले के शेरपुर स्योढ़ा गांव के खत्री पहाड़ में अब तक निर्विवाद ‘आसन' में विराजमान होने वाली देवी मां अब की बार त्रिकोणीय विवाद में फंस गयी हैं। मंदिर के रख-रखाव करने वाली पंजीकृत प्रबंधकीय समिति के तीन शीर्ष पदाधिकारियों ने फम्र्स सोसायटीज एवं चिट्स झांसी के रजिस्ट्रार के यहां प्रत्यावेदन कर अपने को मंदिर का असली कर्ता-धर्ता बताया है। रजिस्ट्रार ने मामले के निस्तारण हेतु उपजिला मजिस्ट्रेट नरैनी को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया है, लेकिन वह भी नवरात्रि मेला शुरू होने से पूर्व वैधानिक प्रबंधकारिणी का फैसला नहीं दे पाए, लिहाजा तहसीलदार नरैनी को रिसीवर नियुक्त करना पड़ा है। अब चैत्र नवरात्र मेला सकुशल संपन्न कराने की जिम्मेदारी रिसीवर की होगी। उपजिला मजिस्ट्रेट नरैनी नसरुल्लाह ने बताया कि ‘मां विंध्यवासिनी मंदिर के संरक्षण के लिए पंजीकृत प्रबंधकारिणी के तीन शीर्ष पदाधिकारियों ने अलग-अलग दावा कर विवाद उत्पन्न कर दिया था, उभय पक्षों से नियमावली और दस्तावेजी प्रमाण मांगे गए हैं, विवाद के निस्तारण होने तक तहसीलदार नरैनी राजेश कुमार मिश्र बतौर रिसीवर काम करेंगे।'

Maa Vindhyavasini

उन्होंने स्वीकार किया कि ‘देवी मां के करीब पच्चीस लाख रुपए के सोने-चांदी के जेवरात एक पक्ष अपने कब्जे में लिए है, इसी से विवाद उपजा है।' उन्होंने बताया कि ‘इस मंदिर में सलाना चढ़ावा या आमदनी तीस लाख रुपए है।' उधर, शेरपुर स्योढ़ा गांव के लगभग डेढ़ सौ ग्रामीणों ने प्रशासनिक कमिश्नर (आयुक्त) को संयुक्त शिकायती पत्र सौंप कर प्रबंध समिति को हमेशा के लिए भंग कर मंदिर को सरकारी संरक्षण में लेने की मांग उठाई है।

बांदा जिले के शेरपुर स्योढ़ा गांव के खत्री पहाड़ की चोटी में देवी मां विध्यवासिनी का विशाल मंदिर है। लोगों में किंवदंती है कि मिर्जापुर में बसने से पूर्व देवी मां इस पहाड़ में अपना हमेशा का आसियाना बनाना चाहती थीं, लेकिन पहाड़ ने उनका भार सहन करने में असमर्थता जता दी थी। जिससे नाराज होकर देवी ने पहाड़ को कोढ़ी (कुष्ठ रोगी) होने का श्राप दे दिया था, यही वजह है कि इस पहाड़ का पूरा पत्थर ‘सफेद' हो गया है। पड़ोसी गांव पनगरा के बुजुर्ग पंडि़त बद्री प्रसाद दीक्षित का कहना है कि ‘मान्यता है कि पहाड़ के उद्धार के लिए देवी मां नवरात्र की अष्ठमी तिथि को मिर्जापुर का स्थान छोड़कर इस पहाड़ में एक दिन के लिए विराजमान होती हैं, इसलिए अष्ठमी को लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंच कर उनके दर्शन करते है और उनकी मन्नतें पूरी होती हैं।'

अपर पुलिस अधीक्षक बांदा स्वामी प्रसाद ने बताया कि ‘मंदिर में त्रिकोणीय विवाद को देखते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी नरैनी की अगुआई में गिरवां, नरैनी व कालिंजर थाना की पुलिस के अलावा एक बटालियन पीएसी भेजी गई है, जो किसी भी स्थिति से निपटेगी।' कुल मिलाकर यह पहला मौका होगा कि जब नवरात्र की अष्ठमी तिथि को ‘विवादित आसन' में विराजमान होकर देवी मां विंध्यवासिनी अपने श्रद्धालुओं को दर्शन देकर उनकी मन्नतें पूरी करेंगी।

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