पुलिस नहीं अब कॉलगर्ल्स पकड़ेंगी नकली नोट के सौदागरों को
कोलकाता। एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया (कोलकाता का सोनागाछी) में रहने वाली कॉलगर्ल्स नकली नोटों से परेशान हैं। उनका कहना है कि नकली नोटों की पहचान ना होने के कारण कस्टमर उन्हें आसानी से बेवकूफ बनाकर चले जाते हैं। ऐसे में एक एनजीओ ने कॉलगर्ल्स को इस ठगीपन से बचाने का जिम्मा लिया है। एनजीओं कॉलगर्ल्स को नकली नोटों को पहचानने की ट्रेनिग दे रही है ताकि उन्हें यह पता चल सके कि ग्राहक ने जो नोट उन्हें दिये हैं वो नकली है या असली।
मालूम हो कि कोलकता स्थित सोनागाछी एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया है। यहां लगभग 10,000 से ज्यादा सेक्सवर्कर्स रहती हैं। मालूम हो कि अबतक सेक्सवर्कस एड्स की बीमारी से बचने के लिये कई एनजीओ के संपर्क में थी मगर अब उन्हें सबसे ज्यादा फिक्र नकली नोट से बचने के लिये है। पिछले कुछ महीनों के दौरान सोनागाछी में धंधा करने वालीं महिलाओं को काफी संख्या में 500 और 1000 के नकली नोट ग्राहकों से मिले हैं। प्रशासन को शक है कि ये नोट सरहद पार बांग्लादेश से आ रहे हैं।

हालांकि एनजीओ की इस ट्रेनिंग के बाद से सेक्सवर्कर्स का कहना है कि अब नकली नोटों में गिरावट आई है। रिपोर्ट की मानें तो ट्रेनिंग प्रोग्राम के बाद से सोनागाछी में नकली नोटों के प्रसार में 20 फीसदी की कमी आई है। एनजीओ दरबार महिला समन्वय समिति का कहना है कि 10 हजार से ज्यादा महिलाओं को नकली नोटों की शिनाख्त करने की जानकारी दी गई। एनजीओ ने यह भी कहना है कि दुनिया के सबसे पुराने पेशे को दुनिया की सबसे पुरानी समस्या से इस ट्रेनिंग के बाद बहुत हद तक मुक्ति मिलेगी।












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