यूपी में तो जंगल का कानून चल रहा है: भाजपा

कोई अधिकारी जनता के लिये समय पर नही बैठता, पुलिस वाले मनमानी पर उतारू हैं और अफसर मन्त्री की चापलूसी करते रहते हैं। मिश्र ने सपा सरकार के मुखिया अखिलेश यादव से पूछा कि सपाई विधायक अफसरशाही और पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं, मुख्यमंत्री के आदेश नही माने जा रहे हैं, अफसरशाही नियन्त्रण के बाहर है, पुलिस वाले पिट रहे हैं, सपा सुप्रीमों मंत्रियों के भ्रष्टाचार की चर्चा खुलेआम कर रहे हैं और मुख्यमंत्री बेचारे नजर आ रहे हैं, ऐसी परिस्थितियों में प्रदेश के भविष्य का कौन जिम्मेदार है? जनता किससे उम्मीद करे। प्रदेश प्रवक्ता मिश्र ने याद दिलाया कि सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह जी मंत्रियों पर भ्रष्टाचार, मनमानी तथा दलालों द्वारा घिरे होने के बयान सार्वजनिक तौर पर दे चुके हैं।
सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस प्रमुख तथा प्रमुख सचिव गृह की होने पर मिश्र ने कहा कि इस पार्टी का सबसे प्रिय शगल कानून व्यवस्था को तोड़ने का है। विधायक, मंत्री और निरंकुश अफसरशाही के मकड़जाल में प्रदेश की कानून व्यवस्था फंस गई है तथा छटपटा कर दम तोड़ रही है। कारण कोई भी हो परन्तु यह सत्य है कि पूरा प्रदेश अराजकता, निरंकुश अफसरशाही, अपराधियों को खुली छूट तथा सत्ता पक्ष के लोगों की मनमानी का शिकार है। मिश्र ने कहा कि एक सप्ताह में प्रदेश के अन्दर तीन ट्रेनों में डकैती, एक दिन में दिन-दहाड़े कई-कई हत्याएं, सरेआम दुष्कर्म की घटनाएं, ब्लाक प्रमुख की थाने में पिटाई, सपाई विधायक तक को दो घण्टे मेरठ के थाने में बिठाये जाने और पशु तस्करों द्वारा मुरादाबाद में पुलिस बैरियर तोड़े जाने के अलावा ऐसी तमाम घटनाएं हैं जो प्रदेश की कानून व्यवस्था की बदहाल तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। मिश्र ने मांग की कि प्रदेश की सरकार असमंजस तथा अराजकता से मुक्त होकर सुशासन कायम करें।












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