निराश ना हों देशवासियों विकास की धीमी रफ्तार अस्थाई है: मनमोहन

लेकिन विकास की इस नई इबारत को लिखने के लिए सरकार और व्यावसायिक क्षेत्र की साझेदारी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, विकास दर में आई गिरावट अस्थाई है। हमें इसे समझना चाहिए और इसे दुरुस्त करने के लिए सही कदम उठाने चाहिए। मुझे नहीं लगता कि भविष्य में भी हमारी विकास दर पांच प्रतिशत ही रहेगी। पिछले 10 वर्षो में हमने आठ प्रतिशत विकास दर हासिल की है और हम इसे फिर हासिल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज यह आम राय है कि जब तक सरकार तत्परता से कदम नहीं उठाएगी, पहले से ही धीमी विकास दर पूरे साल पांच प्रतिशत ही बनी रहेगी। उद्योग जगत से सरकार में विश्वास बनाए रखने और नकारात्मकता से विचलित नहीं होने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, वर्ष 2007 के अपने पिछले संबोधन में भी मैंने बिल्कुल अगल बात कही थी। जब सबकुछ ठीक चल रहा था तो मैंने सावधानी बरतने के लिए कहा था। आज फिर मैं लीक से हटकर बात कर रहा हूं। यदि वर्ष 2007 में व्यावसायिक गतिविधियां संभावनाओं से भरी थीं तो मैं समझता हूं कि इस वक्त इस क्षेत्र में पूरी तरह निराशा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2008 की वैश्विक मंदी से पूरी दुनिया प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि नौकरशाही में भ्रष्टाचार तथा लालफीताशाही की समस्याएं हैं, गठबंधन राजनीति चलाना आसान नहीं है, लेकिन ये अचानक सामने आए मुद्दे नहीं हैं। ये मुद्दे तब भी थे, जब देश की आर्थिक विकास दर आठ प्रतिशत थी। उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्था के विकास की धीमी रफ्तार अस्थाई है, जो समय-समय पर होती रहती है। हमें इस पर कार्रवाई करनी चाहिए और सही कदम उठाने चाहिए। यदि हम 15 साल पीछे जाएं तो हमारी औसत विकास दर 7.5 प्रतिशत थी और इस तरह का उत्साह अचानक खत्म नहीं होता।
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था निजी क्षेत्र से संचालित होती है। निजी क्षेत्र में निवेश 75 प्रतिशत है और संपूर्ण विकास के लिए इसे दुरुस्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समस्या वैश्विक मंदी के कारण है। वर्ष 2008 के संकट से दुनिया बाहर आ चुकी है और इस वक्त यह यूरोजोन में कर्ज संकट के कारण लड़खड़ाई हुई है। यूरोप में विकास नकारात्मक है और जापान में शून्य है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए घरेलू स्तर पर कदम उठा रही है। उन्होंने कहा, "हम भारतीय अर्थव्यवस्था की बेहतरी के मार्ग में आने वाली घरेलू रोड़ों को दूर करने के लिए सशक्त कार्रवाई कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, मैं निवेश पर मंत्रिमंडल की समिति के पिछले तीन महीने के काम से उत्साहित हूं। समिति ने परियोजनाओं की जल्द मंजूरी के लिए लीक से हटकर काम किए हैं। उन्होंने कहा, 11वीं पंचवर्षीय योजना में हमने न केवल आठ प्रतिशत विकास दर हासिल किया, बल्कि हमारा विकास अधिक संपूर्ण रहा। यदि हमने 11वीं पंचवर्षीय योजना में यह हासिल किया तो 12वीं पंचवर्षीय योजना में बेहतर प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते? (आईएएनएस)












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