Exclusive: यूपी में कांग्रेस-भाजपा के बीच समझौता!
लखनऊ (नवीन निगम)। उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन तलाश रही भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के लिए एक समझौता कर लिया हैं। यह अलग बात है कि इस समझौते के लिए न दोनों दलों के नेताओं में बातचीत हुई और न ही कोई बैठक, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों दलों ने यह तय किया है कि वह जनता के बीच क्षेत्रीय दलों के खिलाफ इस बात का प्रचार करेंगे कि यह दल लोकसभा में जीतने के बाद जनता के वोट का ख्याल न करते हुए अपनी मर्जी से समर्थन देने, न देने का फैसला करते है।
दोनों दलों का इस बात पर भी जोर रहेगा कि आप कांग्रेस और भाजपा को ही वोट दे। कांग्रेस के नेता अपने भाषणों में भाजपा को जमकर कोसेंगे और ऐसा ही भाजपा के नेता कांग्रेस के लिए करेंगे, लेकिन भाषण के बीच में वह यह भी कहेंगे कि यदि आपको हम पसंद नहीं है तो आप हमें वोट न दे लेकिन वोट राष्ट्रीय पार्टी को ही दे। दोनों दलों के नेता भाषण में यह भी कहते नजर आएंगे कि केंद्र में या तो कांग्रेस सरकार बनाएंगी या भाजपा इसलिए आप सीधे उन्हें ही वोट दे जो सरकार बना सरकते है, सरकारों को ब्लैकमेल करने वाले, आपकी सहमति लिए बगैर आपके वोट का सौदा करने वालों को वोट न दे।

बेनी प्रसाद वर्मा ने कल बाराबंकी में इस आशय के संकेत दे दिए हैं। बाराबंकी में पूर्व विधायक छोटेलाल यादव के घर आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में शिरकत करने पहंचे बेनी ने इशारों ही इशारों में इस नीति की घोषणा कर दी। दोनों दलों ने इस नीति को यू ही नहीं अपनाया हैं। मुलायम ने जिस दिन शरद पवार से मुलाकात की उस दिन के बाद से भाजपा और कांग्रेस तीसरे मोर्च के निर्माण की हवा निकालने में जुट गए। प्रचार में अपने बाद दूसरी राष्ट्रीय पार्टी को जिताने की अपील इसी के तहत शुरू की गई हैं जिससे तीसरे मोर्चे के निर्माण की हवा निकल जाए।
उत्तर प्रदेश में क्योंकि दोनों राष्ट्रीय पार्टियां हाशिए पर है इसलिए इस प्रकार का प्रचार दोनों को फायदा पहुंचाएगा। कांग्रेस को जहां इस प्रचार के चलते अपने मुस्लिम और दलित वोट बढऩे की उम्मीद है वहीं भाजपा को मुस्लिम वोट में बिखराव और कुछ पिछड़े वोट अपनी झोली में आने की उम्मीद है।












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