भारत में कोख में ही शुरू होता है लड़का-लड़की में भेदभाव: रिसर्च
नई दिल्ली। अमेरिका में हुए एक रिसर्च से पता चला है कि भारत में लड़का-लड़की में भेदभाव गर्भ से ही शुरू हो जाता है। अगर मां-बाप को पता चल जाये कि कोख में लड़का है, तो मां की ज्यादा केयर की जाती है, जबकि पता चल जाये कि लड़की है, तो या तो उसे मार दिया जाता है या उसकी केयर न के बराबर होती है।
यह अफसोसजनक तथ्य मिशिगन स्टेट विश्वविद्यालय के लियेह लकडावाला और कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रशांत भारद्वाज द्वारा किये गये एक शोध में सामने आये हैं। 30 हजार भारतीयों पर किये गये इस अध्ययन के मुताबिक भारत में गर्भावस्था के दौरान लिंग पता करवाना कानूनन अपराध है, लेकिन फिर भी अल्ट्रासाउंड क्लीनिक इस धंधे को चलाकर जमकर पैसा कमा रही हैं। जब पता चलता है कि पेट में लड़का है, तो गर्भावस्था को पूरा करने की प्लानिंग तुरंत बन जाती है, लेकिन पेट में लड़की होने की बात पता चलने पर पहले उसे मारने की काशिश की जाती है। अगर अबॉर्शन करने से मां की जान को खतरा होता है, तो लोग केयर करना बंद कर देते हैं।

कई जगह देखा गया है कि यह पता चलने पर कि पेट में लड़की है, मां को जरूरी टीके नहीं लगवाये जाते हैं और जिस कारण बच्चा पैदा होने के थोड़ी ही देर बाद मर जाता है। इस प्रकार के परिणाम सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी देखने को मिले। हालांकि श्रीलंका, थाईलैंड और घाना में परिणाम बिलकुल अलग थे। यहां लड़का-लड़की में भेदभाव नहीं समझा जाता है।












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