मध्य प्रदेश- विकास की दौड़ में काला घोड़ा
भोपाल। देश में तेजी से विकास कर रहे राज्यों की बात आये, तो गुजरात और मध्य प्रदेश दोनों का नाम सबसे ऊपर आता है। गुजरात की गाथा से हर कोई परिचित है, लेकिन मध्य प्रदेश को भी हलके में नहीं लें, क्योंकि ये रेस का वो काला घोड़ा है, जो कभी हारता नहीं। अगर पीछे पलट कर देखें तो एमपी ने पिछले 10 साल में कई क्षेत्रों में ऊंचाईयां प्राप्त की हैं।
जिस प्रकार गुजरात का मतलब मोदी है, उसी प्रकार एमपी के सीईओ के रूप में शिवराज सिंह चौहान को जाना जाता है। एक दशक पहले जब भाजपा की सरकार यहां आयी, तब कई क्षेत्र खस्ताहाल थे, लेकिन आज चौतरफा विकास की लहरें उठ रही हैं। कहते हैं, जिस प्रदेश का गांव राजधानी से जुड़ जाये, वह राज्य सबसे तेजी से विकास करता है। मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां के दूर-दराज के गांव सड़कों से कनेक्ट कर दिये गये। राज्य में करीब 80 हजार किलोमीटर लंबी सड़कें बनवायी गईं। यह सफलता मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, जिसे शिवराज सरकार ने शुरू किया और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जिसे एनडीए ने शुरू किया और यूपीए ने आगे बढ़ाया, की वजह से संभव हुआ। इस योजना के अंतर्गत लगभग सभी गांव सड़क से जुड़ चुके हैं।

अर्थव्यवस्था की बात करें तो कृषि में तेजी से समृद्धि हासिल की। मध्य प्रेदश और साथ में बिहार ऐसे राज्य हैं, जहां किसानों की इनकम पिछले पांच सालों में सबसे तेजी से बढ़ी है। यह बात मुरली मनोहर जोशी ने इंगित की थी। राज्य सरकार ने कृषि को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों के उत्थान की योजनाएं चलायीं। इस वजह से राज्य में कृषि भूमि 7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 22 लाख हेक्टेयर हो गई। इसके लिये शिवराज सिंह चौहान को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित भी किया गया। एमपी को बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट इन एग्रीकल्चर का अवार्ड मिला।
यही नहीं मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों की वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के लिये सरकार ने लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया। सिर्फ लघु उद्योग लगाने के लिये तरह-तरह की स्कीमें ही नहीं आयीं, बल्कि लोन दिया और उद्योग चलाने के लिये बिजली की अच्छी सप्लाई भी। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना की वजह से हजारों नौजवानों को रोजगार मिला। यूं कहिये कि वो खुद की कंपनी के मालिक बने। उन्हें 25 लाख तक का लोन और वो भी मात्र 5 फीसदी की ब्याज दर पर। इस वजह से यहां तेजी से लघु उद्योग बढ़ा।
बिजली के मामले में चौहान सरकार का जवाब नहीं। यहां पर नये प्लांट लगाने के साथ-साथ पहले से चल रहे पावर प्लांट को और विकसित किया गया। चौहान के सीएम बनने के पहले राज्य को कुल 2900 मेगावॉट बिजली मिलती थी, आज यहां 6000 मेगावॉट बिजली मिल रही है।
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश नाम का घोड़ा विकास की रेस में तेजी से दौड़ रहा है। यही कारण है कि अब देश-दुनिया की निगाहें इस राज्य पर टिक गई हैं। कई अन्य राज्य भी एमपी से सबक लेकर उसके मॉडल को अपनाने के प्रयास कर रहे हैं।












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