मुस्लिम नवाब की देन है लखनऊ का होली मेला
लखनऊ (ब्यूरो)। वैसे तो नवाबों का शहर लखनऊ अपनी तहजीब के साथ-साथ गंगा-जमुनी संस्कृति के लिए देश भर में मशहूर है। लेकिन आपको जानकार आश्चर्य होगा कि नवाबीकाल में शुरू की गई एक परम्परा आज भी शहर की शोभा बढा रही है। वह है चौक का ऐतिहासिक होली मेला। यहां के बुजुर्ग मेला शुरू होने का सही वर्ष तो नहीं बता सके लेकिन इतना जरूर बताते हैं कि तकरीबन सैकडों साल पहले नवाब गाजीउददीन हैदर ने इस ऐतिहासिक होली मेले की शुरूआत की थी।
मेले की सबसे बडी बात यह है कि इसकी न तो कोई आयोजन समिति है और न ही पदाधिकारी। बस लोग आते रहे और कारवां बनता गया। पुराने लखनऊ के चौक का अपना अलग इतिहास रहा है। यहां की ठंडाई, चिकन और रेवडी दूर-दराज तक मशहूर है। लेकिन यहां होली के दिन लगने वाले ऐतिहासिक होली मेले में गंगा-जमुनी तहजीब आज भी नजर आती है। स्थानीय निवासी ओम प्रकाश दीक्षित बताते हैं, वक्त बदलाकृमाहौल बदला..लेकिन नहीं बदली तो नवाब गाजीउददीन हैदर द्वारा शुरू की गई होली मेले की परम्परा। श्री दीक्षित बताते हैं कि यह मेला ढेर सारी ऐतिहासिक यादें समेटे हुए है। इस मेले को शुरू करने का उददेश्य सभी धर्मों के लोगों में भाईचारा बढाना था।

वह बताते हैं कि चौक के कोनेश्वर मंदिर से लगने वाले इस विशाल ऐतिहासिक मेले की खास बात यह है कि इसक कोई आयोजन समिति नहीं है। लोग आते रहे और मेला लगता गया। वह बताते हैं कि इस मेले में शुरू से ही होली मिलन का दौर चलता रहा है। यही नहीं, मेले में घूमने आने वालों को गुलाल और इत्र छिडक कर होली मिलन का सिलसिला बस्तूर आज भी जारी है। मेले की खासियत यह भी रही है कि यहां हिन्दी के मशहूर साहित्यकार अमृत लाल नागर भी जीवित रहने तक मेले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे।












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