देश का पहला ’महिला किसान मेला‘ प्रतापगढ़ में
प्रतापगढ। आम बजट में वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने जब महिलाओं को खास सौगातें दीं, तो दुनिया भर में तारीफ हुई। अरे भाई प्रतापगढ़ में भी महिलाओं के लिये कुछ खास हुआ है, तो तारीफ तो बनती है। जी हां यहां पर वामाशक्ति नाम के संगठन ने देश का पहला महिला किसान मेला आयोजित किया।
प्रतापगढ़ के रानीगंज गांव में गुरूवार को आयोजित इस मेले में करीब साढ़े तीन हजार महिला किसानों ने भाग लिया। वामाषक्ति 3000 महिला किसानों का एक संघ है जिसे एग्रीबिजनेस सिस्टम्स इन्टरनेषनल और बीएआईएफ डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेंशन का सहयोग प्राप्त है। आगरा, शाहजहांपुर, अमेठी, सुलतानपर, फैज़ाबाद, बाराबंकी, गोरखपुर, रायबरेली, इलाहाबाद से करीब 3500 महिला किसानों ने इस मेले में भाग लिया। मेले के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को एक मंच मिला जिसमें वो खेती की नई तकनीक सीख सकीं और किसानों के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकी।
एएसआई की प्रोग्राम मैनेजर सुश्री शिप्रा देव ने बताया कि "इस प्रकार का मेला एएसआई के 'सुनहरा इंडि़या प्रोजेक्ट' का भाग है और इसकी आवष्यकता इस तथ्य से उभरी है कि कृषि संबंधी गतिविधियों में शामिल होने के बावजूद भी खेती में महिलाओं का योगदान हमेशा अनदेखा किया गया है। पूरी सामाजिक और संस्थागत प्रणाली उन्हे किसानों के रूप उन्हें पहचान नही देती। खेती के उनके कार्यो को दैनिक घरेलू जिम्मेदारियों का ही एक विस्तार माना जाता है जिसका कोई आर्थिक मूल्य नहीं है।
बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के समर्थन से 'सुनहरा इंडि़या प्रोजेक्ट', पूरे उत्तर प्रदेश में 25000 किसानों के साथ काम कर रहा है जिसमें से 6000 शाहजहांपुर, सुलतानपर और प्रतापगढ़ जि़ले की महिलाएं हैं। इस मेले का मुख्य उद्देष्य महिला किसानों को महिला किसानों द्वारा नई कृशि तकनीकों को अपनाने के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रेरणा और समर्थन देना था, जिससे उनके कृषि उत्पादन की क्षमता और सम्मान बढाया जा सके। इसके अलावा प्रतिभागियों को सरकारी कार्यक्रमों और लाभ के लिए उपलब्ध अन्य सेवाओं से अवगत कराया गया।
खेती की वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी जैसे कि नियंत्रित परिस्थितियों में नर्सरी स्थापित करना, मिट्टी का नमूना इकठ्ठा करना, मिटटी की जांच करना, सुरक्षित खेती के अंतर्गत ट्रे और पालीटनल में नर्सरी तैयार करना, समेकित कीट नियंत्रण, बेलों को तार पर चढ़ाना, धूप से मिटटी का उपचार कराना, केंचुये की खाद बनाना आदि को महिलाओं ने महिलाओं द्वारा सीखा।

भारती एयरटेल का सहयोग
भारती एयरटेल के स्टाल पर एयरटेल़-इफको सिम के द्वारा कृशि संबधी जानकारियों को प्रतिदिन वायस मैसेज के माध्यम से निशुल्क प्राप्त कर उसके लाभ और प्रयोग बताये गये।

परिचर्चाएं हुईं
इसके अलावा, इस अवसर पर किसानों के लिए विभिन्न तरह के परिचर्चाओ, लघु फिल्मों की स्क्रीनिंग और अन्य मनोरंजक गतिविधियों को आयोजित किया। वामाषक्ति, एनजीओ और कम्पनियों द्वारा मेले में करीब 35 स्टाल खेती से संबंधित विभिन्न मुद्दों का समाधान करने के लिए स्थापित किए गए थे।

कृषि उत्पादों की जानकारी
प्रतिभागियों के बीच महिलाओं के अधिकारों और पात्रता के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भी स्टाल लगाए गए थे। विभिन्न कृषि संबधी उत्पादों से जुड़ी कंपनियों जैसे कोरोमंडल, यूपीएल, महको, अंकुर, सिन्जेन्टा, खुषहाली, आदि ने भी इसमें हिस्सा लिया।

किताबें भी बांटी
इसके अलावा, कुछ किताबें जैसे कि 'बेहन डाले की तकनीक', 'लेया माटी का नमूना', 'केचुए वाली खाद', और 'खाद की पहचान' को मेले में जारी किया गया। स्थानीय भाशा में, मोटें अक्षरों में और बहुत सारे चित्रों के साथ यह किताबें नव-साक्षर किसान महिलाओं और कम साक्षर पुरुषों के लिए बनी है।

याद किया जग्गी देवी को
दीप्तिप्रिया मल्होत्रा द्वारा जग्गी देवी (एक सामाजिक कार्यकर्ता जिन्होनें प्रतापगढ़ जिले की स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महिला किसानों को एक जुट किया और उनकी भागेदारी जुटाई) पर एक किताब का भी इस मेले में विमोचन किया गया। महिला किसान मेले को देखनें के लिए फैज़ाबाद से पुरूष किसानों का एक समूह भी आया था।












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