Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

राजस्‍थान के लिये उम्‍मीद की किरण हैं वसुंधरा राजे

क्‍या आपको लगता है अलवर में शाहजहांपुर से जयपुर तक 150 किलोमीटर की दूरी तय करने में 12 घंटे लगेंगे? किसी से पूछिये या अनुमान लगाने पर ज्‍यादा से ज्‍यादा साढ़े तीन घंटे कहेगा, लेकिन जब वसुंधरा राजे ने यह यात्रा की, तो उन्‍हें 12 घंटे क्‍यों लगे। ऐसा ही त्‍योहार जैसा मंजर था 8 फरवरी को जब वसुंधरा राजे इस मार्ग पर चलीं। हजारों लोग वसुंधरा राजे की एक झलक पाने को बेताब दिखे। वृद्ध, युव, हिन्‍दू, मुस्लिम, सर्वण वर्ग, व निचली जाति, सभी एक ही महिला को देखना चाहते थे। यह मंजर सिर्फ अलवर से जयपुर का नहीं बल्कि पूरा राजस्‍थान अब वसुंधरा को ही अगले मुख्‍यमंत्री के रूप में देखना चाहता है।

पिछले चार-पांच साल वसुंधरा राजे के लिये आसान नहीं थे, लेकिन जब उन्‍हें लोगों की दुआएं और प्‍यार मिला तो उन्‍हें आगे बढ़ने से अब कोई नहीं रोक सकता है। राजे इस समय न केवल भाजपा की प्रदेश अध्‍यक्ष हैं, बल्कि पार्टी का चेहरा भी हैं, जो इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायेंगी। खास बात यह है कि इस शो की सिर्फ एक स्‍टार होंगी और वो हैं वसुंधरा!

Vasundhara Raje

वसुंधरा ही क्‍यों?

आप सोच रहे होंगे कि आखिर राजस्‍थान की राजनीति में निर्णायक भूमिका वसुंधरा कैसे निभा सकती हैं? चुनाव के दौरान उनके बिना भाजपा को मुश्किलों का सामना क्‍यों करना पड़ सकता है? इन्‍हीं सवालों के जवाब हैं-

1. क्‍योंकि आंकड़े ऐसा कह रहे हैं

अगर आप आंकड़ों पर ध्‍यान दें तो सभी संख्‍या वसुंधरा राजे के पक्ष में दिखेंगी। उन्‍हीं के नेतृत्‍व में 2003 में राजस्‍थान में भाजपा की सर्वश्रेष्‍ठ जीत हुई थी। उस समय भाजपा को 200 में से 120 सीटें मिली थीं यानी 40 फीसदी।

1980 से लेकर अब तक सीटों का ब्‍योरा और भाजपा की भूमिका

वर्ष सीटें वोट प्रतिशत भाजपा के परिणाम
1980 38 21.24 विपक्ष
1985 32 18.60 विपक्ष
1990 85 25.25 सत्‍ता
1993 95 38.60 सत्‍ता
1998 33 33.23 विपक्ष
2003 120 39.20 सत्‍ता
2008 78 34.27 विपक्ष

ऊपर तालिका में आप देख सकते हैं कि पिछले तीन दशकों में भाजपा ने दो बार सरकार बनायी लेकिन प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। लेकिन 2003 में वसुंधरा राजे के हाथ में कमान सौंपे जाने के बाद भाजपा को व्‍यापक स्‍तर पर बढ़त हासिल हुई। देखा जाये तो 2003 में भाजपा का सर्वोत्‍तम प्रदर्शन रहा। इस समय राजे और उनकी टीम विपक्ष में है।

2 क्‍योंकि भ्रष्‍टाचार में डूबी हुई है अशोक गहलोत की सरकार

यदि वर्तमान कांग्रेस सरकार पर नजर डालें तो राज्‍य सरकार गले तक भ्रष्‍टाचार में डूबी हुई है। अप्रैल 2011 से आयीं तमाम खबरों में राजस्‍थान सरकार को बेनकाब किया गया। 11 हजार करोड़ के घोटाले मं गहलोत के परिवार तक के शामिल होने की बात आयी। उनके परिवार के सदस्‍य मुंबई में रियल इस्‍टेट के कारोबार को आगे बढ़ाने में राजनीतिक सपोर्ट ले रहे हैं। खुद गहलोत ने अपने भाई-बंधुओं की कंपनियों के हित में कई निर्णय लिये। यहां तक राजस्‍थान में कोई भी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से संबंधित सौदा हो, जब तक गहलोत के परिवार का हस्‍तक्षेप नहीं हो, तब तक पास नहीं होता।

जब सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाडरा के कारोबार से जुड़ीं खबरें आयीं तो एक बात उठी कि उनके बिजनेस में किसी राज्‍य सरकार ने भारी फायदा पहुंचाया है। वो राजस्‍थान सरकार ही थी। वाडरा को मुनाफा पहुंचाने में गहलोत प्रशासन ने भूमि से लेकर जमीर तक सब बेच डाला, सिर्फ पैसा कमाने और 10 जनपथ में वफादारी पेश करने के लिये।

इस दौरान वसुंधरा राजे ने लोगों के सामने गहलोत सरकार को बेनकाब करने का एक भी अवसर नहीं छोड़ा। जनता को अब इस बात का अहसास हो गया है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार प्रदेश को एक दशक पीछे धकेल चुकी है, लिहाजा गहलोत सरकार को सबक सिखाना चाहती है।

3. समाज का कोई तबका, महिलाएं या अल्‍पसंख्‍यक राजस्‍थान में सुरक्षित महसूस नहीं करता है

आज राजस्‍थान में समाज का कोई भी तबका ऐसा नहीं है, जो खुद को सुरक्षित महसूस करता हो। चाहे वो महिलाएं हों या पुरुष। हर व्‍यक्ति इस समय नाखुश है। सिक्‍के के दूसरी ओर देखें तो कोई ऐसा समाज नहीं है, जहां वसुंधरा राजे का नाम प्रख्‍यात नहीं हो। चाहे गांव के किसान हों, या फिर शहर के बिजनेसमैन सभी से एक जैसा व्‍यवहार। वो वृद्ध किसान से भी उतनी ही अच्‍छी तरह बात करती हैं, जितनी अच्‍छी तरह एक युवती से। राजे ने महिलाओं, दलितों और अल्‍पसंख्‍यकों के साथ एक गहरा नाता जोड़ लिया है। यह महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि दलित और मुसलमान पहले भाजपा के समर्थक कम ही हुआ करते थे।

भंवरी देवी कांड के बाद से महिलाओं का विश्‍वास वर्तमान सरकार के ऊपर से उठ चुका है। सामाजिक मुद्दों पर बात करने के बजाये राजस्‍थान सरकार महिलाप मदेरणा और मल्‍खान सिंह बिश्‍नोई को बचाने में जुटी हुई है। दोनों ही नेताओं के कांग्रेस के साथ मजबूत संबंध हैं।

कहानी पूरी तरह बदल जाती है, जब वसुंधरा राजे की बात आती है, क्‍योंकि वो खुद एक महिला हैं। और उस नाते वो महिलाओं के दर्द को समझती हैं और जब वो सत्‍ता में थीं, तब महिलाओं के उत्‍थान के लिये कई कार्य हुए थे। भंवरी देवी का मामला उजागर होने पर वसुंधरा ही थीं, जिन्‍होंने दोनों नेताओं को हटाने की मांग की। आज जब वो राज्‍य में कहीं जाती हैं, तो भारी संख्‍या में महिलाएं उन्‍हें सुनने आती हैं। ये महिलाएं खुद को राजे के समक्ष सुरक्षित महसूस करती हैं।

कांग्रेस दावा करती है कि वो मुसलमानों का खास खयाल रखती है, लेकिन गोपालगढ़, भरतपुर में मुसलमानों पर पुलिस का अत्‍याचार क्‍या था। यहां पर पुलिस की बर्बरता की पोल खोनले वाली कोई और नहीं बल्कि कांग्रेस विधायक जाहिदा खान ही थीं। यहां तक राष्‍ट्रीय मॉयनॉरिटी कमीशन ने इस मामले के लिये राज्‍य सरकार को ही जिम्‍मेदार ठीराया था।

हाल ही में एक सर्वे हुआ, जिसमें पाया गया कि मुस्लिम वोटर गहलोत सरकार से नाखुश हैं और असुरक्षित महसूस करते हैं। वो मानते हैं कि वसुंधरा के शासन में वो ज्‍यादा सुरक्षित थे। यह बात गौर करने वाली है।

जहां तक युवाओं की बात है, तो नौकरियों की कमी, जन-विरोधी नीतियां और बढ़ती महंगाई के कारण युवाओं और गहलोत के बीच गहरी खायी बना दी है। इसका ट्रेलर छात्रसंघ चुनाव में देखने को मिल ही गया, जहां कांग्रेस की एनएसयूआई को हर तरफ हार झेलनी पड़ी। तब तो और जब स्‍कूली छात्राओं ने सुविधाओं के अभाव की बात कही।
राज्‍य के युवा अब वसुंधरा राजे की ओर देख रहे हैं। उन्‍हें उधर अवसर दिखाई दे रहे हैं। जयपुर के एक छात्र ने मुझे बताया कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो शिक्षा के लिये लिया गया लोन उनके माता-पिता के लिये चुकाना कठिन होगा। भाजपा के शासन में सबकुछ अलग था। मुझे लगता है कि ऐसा बाकी छात्र भी जरूर सोचते होंगे।

4 क्‍योंकि सरकार स्‍वर्ण शून्‍य तक पहुंच गई है

थोड़ा बहुत भ्रष्‍टाचार माफ किया जा सकता है, लेकिन भारी भरकम भ्रष्‍टाचार और शासन के नाम पर कुछ नहीं, इसे माफ करना बहुत कठिन हे। यह बात राजस्‍थान का एक लेबर कहता है। राजस्‍थान सरकार को कोसने वाला यह लेबर कहता है, "देखिये गुजरात की तरक्‍की देखिये, वह स्‍वर्ण युग की ओर अग्रसर है और पड़ोसी राज्‍य राजस्‍थान में क्‍या है, शून्‍य। हमारे परिवार के कई सदस्‍य अब गुजरात भाग रहे हैं।" इसके अलावा गहलोत के शासन में राजस्‍थान की जीडीबी गिर कर 5.4 प्रतिशत होना। साफ दर्शाता है कि सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। ई-गवर्नेन्‍स के मामले में भी सरकार बहुत पीछे है।

क्‍या ऐसी सरकार दोबारा आनी चाहिये?

पश्चिम बंगाल में लेफ्ट का पतन हो गया, अब ममता बनर्जी प्रदेश को तेजी से आगे ले जा रही हैं। गुजरात में नरेंद्र मोरी का करिश्‍मा ऐसा है, जिससे अमेरिका तक वाकिफ हो चुका है। महाराष्‍ट्र में कांग्रेस-एनसीपी और उत्‍तर प्रदेश में सपा। दुर्भाग्‍यवश राजस्‍थान इन मामलों में फेल साबित हो रहा है। गहलोत और उनकी टीम की सिर्फ एक विचारधारा है वो है भ्रष्‍टाचार और आलाकमान के लिये वफादारी। यहां तक अब कांग्रेस के विधायक भी असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।

इस समय राजस्‍थान के लोग अंधेरे में जी रहे हैं और उम्‍मीद की एक किरण दिखाई दे रही है। वो किरण जो उन्‍हें विकास और समृद्धि की ओर ले जायेगी, जहां पुलिस की गोलियां बेकसूर लोगों को नहीं लगेंगी, जहां महिलाएं आत्‍मसम्‍मान के साथ जियेंगी और सुरक्षित रहेंगी, जहां अवसर बनेंगे और वो हैं वसुंधरा राजे। अब आप ही बताइये गहलोत की सरकार दोबारा आनी चाहिये?

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+