सेटेलाइट से पता चला खतरे में है हिमालय

करेंट साइंस के नवीनतम अंक में प्रकाशित रिपोर्ट में एनआरएससी के अनुसंधानकर्ता बाबू गोविंद राज और सहायकों का कहना है कि हिमानी झील करीब 630 मीटर चौड़ी और 20 मीटर गहरी है। यह 98.7 हेक्टेयर भूमि में फैली है और इसमें 19.7 अरब लीटर पानी भरा हुआ है। अनुसंधानकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अचानक फटने से यह निचले इलाके में विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा है कि झील के फटने की आशंका प्रबल है।
उन्होंने हालांकि यह भी कहा है कि यह उनका प्रारंभिक आकलन है और अत्यंत ऊंचाई पर बनी झील के खतरे की पुष्टि करने के लिए और अध्ययन किए जाने की जरूरत है। 1962 और 2008 के बीच ल्होनक हिमनद के सिंकुड़न और हिमानी झील के बढ़ते आकार का अनुमान लगाने के लिए अमेरिकी लैंडसेट, सीओआरओएनए और टेरा उपग्रहों के अलावा भारत के अपने उपग्रह रिसोर्ससेट-1 का इस्तेमाल किया गया।
इस अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि ल्होनक हिमनदी का आकार 1962 और 2008 के बीच 1.9 किलोमीटर कम हो गया। 1962 में हिमानी झील पिघले हुए बर्फ के पानी का एक छोटा सा तालाब भर था। एनआरएससी के वैज्ञानिकों ने कहा कि यह झील अभी भी हिमनदी के अग्र भाग से जुड़ा है, लेकिन हिमनदी के सिंकुड़ने के कारण इसका आकार बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि चूंकि हिमालय की हिमनदियां तेजी से सिंकुड़ रही हैं इसलिए हिमानी झीलों की सूची तैयार करना और इन झीलों के फटने से इलाके में बाढ़ आने के खतरों से पूर्व सचेत करने की पद्धति विकसित करना जरूरी हो गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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