सरकार ने मानी मांग कहा 'हैंग द रेपिस्ट'

नयी दिल्ली। महिलाओं के खिलाफ अपराध की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने कानून को और सख्त बनाने की कवायत शुरु कर दी है। सरकार ने वर्मा कमेटी की सिफारिशों को मानते हुए बलात्कार कानून में बड़े फेरबदल को मंदूरी दे दी है। इस कानून के बाद दुष्कर्म के जधन्य अपराध मामलों में फांसी की सजा का प्रावधान हो जाएगा। महिला सुरक्षा मुद्दे पर कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार ने ये अध्याधेश जारी किया है। काबिनेट की मुहर लगने के बाद सरकार इसे राष्ट्रपति के पास सहमति के लिए भेजेंगी।

राष्ट्रपति की सहमति के बाद इसे सदन में पेश कर कानून में संशोधन कर लिया जाएगा। दरअसल दिल्ली गैंगरेप के बाद लोगों के आक्रोश को देखते हुए सरकार ने महिला सुरक्षा मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए एक कमेटी गठित की। जस्टिस वर्मा के संरक्षण में बनी इस कमेटी ने एक महिनें के भीतर ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।

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जिसके बाद सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए अध्याधेश जारी किया है। इस अध्याधेश में दुष्कर्म की परिभाषा को और व्यापक बनाकर उसे यौन उत्पीड़ने के दायरे में लायाया है।यौन उत्पीड़न की परिभाषा को सरकार ने और व्यापक बनाया है। अब किसी महिला को परेशान करने, असका पीछा करने, उसके निजी क्षणों में तांक-झांक करने, महिला को छूने या फिर उसे निर्वस्त्र करने के साथ महिलाओं की तस्करी करने को यौन उत्पीड़न के दायरे में शामिल किया गया है। इस अध्यादेश के बाद अब दुष्कर्म मामलों में रेप के बजाय यौन उत्पीड़न शब्द का इस्तेमाल करना होगा।

महिला सुरक्षा कानून में क्या है?

इस कानून के तहत गैंगरेप मामले में उम्रकैद की सजा का प्रावधान है, लेकिन अगर गैंगरेप के बाद पीड़िता की मौत हो जाती है तो आरोपी को फांसी की सजा मिल सकती है।
इस कानून के बाद बलात्कार के अलावा यौन उत्पीड़न को रोकने पर भी जोर दिया गया है।
इस कानून के बाद बलात्कार की जगह उसे यौन उत्पीड़न का नाम दिया जाएगा।
इसमें उन आरोपों को भी शामिल किया गया है जिससे महिला को मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
एसिड अटैक जैसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने इसे भी यौन उत्पीड़न के दायरे में शामिल किया है, इसके बाद एसिड अटैक मामलों में दोषियों को 10 साल तक की सजा या फिर 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
एसिड अटैक के दौरान जुर्माने की रकम को पीड़ित के इलाज के खर्च के मुताबिक बढ़ाया भी जा सकता है।
इस कानून के बाद अगर किसी पुलिसवाले या थाने में महिला के साथ बलात्कार किया जाता है तो आरोपी को कम से कम 10 साल की सजा हो सकती है।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए जस्टिस वर्मा कमेटी ने सरकार को कुछ सुझाव दिए थे। जिनमें से कुछ को सरकार ने संशोधित कर मान भी दिया जबकि कुछ संशोधन नहीं माने गए। जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक मुताबिक पत्नी के साथ रेप के खिलाफ भी कड़े कानून की मांग की गई थी, लेकिन सराकर ने इसे अपने अध्याधेश में शामिल नहीं किया है। वहीं आर्म फोर्स द्वारा बलात्कार करने पर उसकी सुनवाई आम अदालतों में करवाने की जस्टिस वर्मा की सिफारिश को भी सरकार ने नकार दिया है। सरकार ने दलील दी है कि आर्मी का अपना कानून है इसलिए उनपर सैन्य नियमों के मुताबिक की कार्रवाई की जा सकती है।

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