आस्‍था का प्रतीक 'महाकुंभ' बना 'रिसर्च का विषय'

इलाहाबाद। संगम तट पर हर बारह वर्षों में होने वाला महाकुंभ अब सिर्फ भारत की सनातन संस्‍कृति की ही पहचान नहीं रहा बल्कि मीडिया के छात्रों के लिए एक शोध का विषय भी बन गया है। इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय के 'सेंटर आफ मीडिया स्‍टडीज' के छात्र महाकुंभ 2013 का अध्‍ययन कर रहे हैं। इसके अलावा मैनेजमेंट संस्‍थानों से अध्‍ययन करने मैनेजमेंट गुरू भी आये हैं।

इस प्रोजेक्‍ट से जुड़े छात्र इसकी डाक्‍युमेंट्री तो बनायेंगे ही साथ ही महाकुंभ से जुड़े विषयों पर रिसर्च भी कर रहे है। इंस्‍टीट्यूट आफ प्रोफेशनल स्‍टडीज के डायरेक्‍टर जी के राय का कहना है कि हमने प्रयाग कुंभ के नाम से एक वेबसाइट भी बनाई है जिस पर कुंभ से जुड़ी तमाम बातों की सूचनाएं हैं। उन्‍होने कहा कि हम इसकी सामाजिक धार्मिक प्रकृति पर अध्‍ययन कर रहे हैं कि कैसे बिना किसी आमंत्रण के दुनिया भर से करोड़ों लोग इस धार्मिक मेले मे हिस्‍सा लेने आते है।

यहां अलग-अलग संस्‍कृति, परंपरा, परिवेश और भाषाओं के लोग आते हैं। सर्वे के अन्‍तर्गत मीडिया के छात्र इसकी फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी तो करेंगे साथ ही इससे जुड़े दस्‍तावेज भी तैयार किये जायेंगे।

महाकुंभ में इस वर्ष दुनिया भर से लगभग 10 करोड़ लोगों के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में यहां लोगों की सुविधा के लिए इंतजाम करना एक कड़ी चुनौती है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार इलाहाबाद और कुंभ मेले के कमिश्‍नर आईएएस अधिकारी देवेश चतुर्वेदी का कहना है कि इस आयोजन की देखरेख करना, आम चुनाव की तरह ही चुनौतीपूर्ण हैं। यह प्रशासन के लिए बेहद मुश्किल काम है। इसे कैसे मैनेज किया जाता है। इसका अध्‍ययन करने के लिए देश के बड़े बड़े संस्‍थानों से मैनेजमेंट गुरू भी आये हुए हैं।

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