भड़काऊ भाषण: अकबरुद्दीन ओवैसी नहीं, पुलिस है मुजरिम

किसी धर्म के खिलाफ भड़काने पर भारतीय सविधान में जेल का प्रावधान है, तो इसमें पुलिस को पूछताछ करने की क्या जरूरत पड़ गई। ओवैसी का गुनाह ऐसे ही इतना बड़ा हो गया, जब उन्होंने आंध्र प्रदेश जैसे राज्य में इतना जहर उगला। वो प्रदेश जहां सांप्रदायिक दंगे तेजी से भड़कते हैं। अरे पूछताछ तो आंध्र प्रदेश के डीजीपी से जनता के प्रतिनिधि को करनी चाहिये, कि 8 से 24 दिसंबर के बीच जनसभाओं में जब ओवैसी ऐसे भड़काऊ भाषण दे रहे थे, तब लोकल इंटेलीजेंस पुलिस कहां थी। क्या एलआईयू के किसी भी इंस्पेक्टर ने यह भाषण रिपोर्ट नहीं किया।
अगर नहीं किया तो उस इलाके की पूरी एलआईयू यूनिट को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिये। अगर वो इस भाषण को रिपोर्ट नहीं कर सकते तो आतंकी गतिविधियों को क्या रिपोर्ट करेंगे। अगर रिपोर्ट की थी, तो पुलिस के उन अधिकारियों को बर्खास्त कर देना चाहिये जो इस भाषण के वीडियो का इंटरनेट पर अपलोड होने तक का इंतजार करते रहे। और उन अधिकारियों को बर्खास्त कर देना चाहिये, जो ओवैसी के इस मामले को दबाने की कोशिश करते रहे।
जब दिल्ली में बलात्कार होता है तो जनता पुलिस को दोष देती है, तो क्या यहां आंध्र प्रदेश पुलिस का कोई दोष नहीं। अरे आंध्र तो दूर, यूपी पुलिस की मानसिकता को ही ले लीजिये, जब ओवैसी के खिलाफ आईपीएस अमिताभ ठाकुर के बेटे-बेटी आदित्य और तान्या ठाकुर लखनऊ के गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गये, तो पुलिस ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया, कि अभी दंगे हुए तो नहीं न, होंगे तो देखा जायेगा। कुल मिलाकर देखा जाये तो राज्य कोई भी हो, सिस्टम में बर्बादी की पहली जिम्मेदार पुलिस है, और यही कारण है कि पुलिस का खौफ अब लोगों के ऊपर से उठता जा रहा है।
ओवैसी केस
गौरतलब है कि भड़काऊ भाषण का वीडियो इंटरनेट पर आने के बाद जब पुलिस 7 जनवरी को उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची तो बीमारी का बहाना बना दिया। आठ जनवरी को शाम 6 बजें ओवैसी के मेडिकल चेकअप के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था जिसके बाद उन्हें देर रात जज के सामने पेश किया गया और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत के अन्तर्गत आदिलाबाद जेल भेज दिया गया था।
ओवैसी से शनिवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पूछताछ की जाएगी। उन्हें 17 जनवरी को फिर से कोर्ट भेजा जाएगा। वहीं कल शुक्रवार की नमाज के बाद चार मीनार के पास पुलिस और मीडियाकर्मियों पर कुछ लोगों ने पथराव किया। पुलिस का कहना है कि यह लोग अकबरूद्दीन ओवैसी के समर्थक हैं। जो कि ओवैसी की गिरफ्तारी से नाराज है।
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