चौथी बार सीएम बने नरेंद्र मोदी कभी बेचते थे चाय
बैंगलोर। गुजरात मे नरेंद्र मोदी जीत के बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे साथ ही आने वाले लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद का दावेदार भी बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भ्रष्टाचार और गुटबाजी का सामना कर रही भाजपा को अब मोदी का ही सहारा है जो उन्हें केंद्र में फिर से ला सकता है। भारतीय राजनीति में एक अलग छवि रखने वाले नरेंद्र मोदी का जीवन किसी फिल्म की कहानी जैसा ही हैं।
मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को मेहसाणा जिले में हुआ था। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता दामोदारदास मूलचंद रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे। मोदी की मां का नाम हीराबेन मोदी है।

जब वह 14 वर्ष के थे तभी से उन्होने चाय की दुकान में अपने पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। उनके पड़ोसी बताते हैं कि जब ट्रेन आती थी तो मोदी हाथ में चाय की केतली लेकर दौड़ पड़ते थे। इसके अलावा वह पांच-पांच पैसों में पानी के ग्लास भी बेचा करते थे। वह पैसे कमाने के लिए कम उम्र में ही वडनगर में एक ऑयल कंपनी के पीपे उठाया करते थे और उन्हें प्रत्येक पीपा उठाने के एवज में पांच पैसे मिला करते थे।
मोदी छात्र जीवन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के तौर पर जुड़ गये थे। वह संघ प्रचारकों की चाय के लिए सुबह पांच बजे दूध लेने जाया करते थे। वह पढ़ने में काफी तेज थे। इतिहास और समाजशास्त्र मोदी के प्रिय विषय थे। उन्होने संघ के एक कार्यकर्ता से राज्य के मुख्यमंत्री बनने तक का सफर तय किया। 7 अक्टूबर 2001 में पार्टी का नेतृत्व परिवर्तन कर भाजपा ने केशुभाई को हटाकर मोदी को मुख्यमंत्री पद पर बिठाया। उसके बाद 2002, 2007 और अब 2012 में वो जीत कर आये हैं।
इस बीच 2002 में हुए गुजरात दंगों के बाद पूरा देश अचानक मोदी के खिलाफ हो गया। खास तौर से कुछ पार्टियों ने मीडिया का सहारा लेते हुए मोदी की छवि हिंदूवादी नेता के रूप में परोसी और लोगों के मन में यह भरने की कोशिश की, कि मोदी मुस्लिम विरोधी नेता हैं। लेकिन इसके बावजूद 2007 में मोदी एक बार फिर जीतकर आये और मुख्यमंत्री बने। इस कार्यकाल में एक बार फिर लोगों ने मोदी के खिलाफ कई अभियान छेड़े, जिसमें आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट का भी सहारा लिया। जब-जब गोधरा कांड के मामले में कोई फैसला आता, देश भर का मीडिया मोदी के पीछे पड़ जाता।
लेकिन विरोधी दलों और मीडिया के तमाम अभियानों को मोदी के विकास रथ ने धता बताते हुए स्पीड पकड़ ली। मोदी के रथ की गति का फायदा जितना ज्यादा भाजपा को पहुंचा, उससे कहीं अधिक गुजरात को पहुंचा। आज देश में नंबर 1 राज्य के रूप में गुजरात उभर कर आ चुका है। यही नहीं 2012 में मोदी को नंबर-1 सीएम भी चुना गया। अमेरिका के थिंक टैंक से लेकर टाइम मैगजीन तक ने मोदी की तारीफों के पुल बांधे। इन सभी ने कहा मोदी का मतलब विकास है और अब यह विकास रथ दिल्ली की ओर बढ़ चुका है।
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