क्या अखिलेश के कार्यक्रम में काले रंग का बुर्का भी नहीं पहन सकतीं छात्राएं?
रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर में आयोजित कन्या विद्या धन वितरण कार्यक्रम में छात्राओं को जींस टॉप और काले कपड़े पहनने पर रोक लगा दी गई। इस तालिबानी फरमान के चलते छात्राओं ने सीएम अखिलेश यादव के पहुंचने से पहले ही जमकर विरोध किया। इस दौरान कई छात्राएं सड़क पर बेहोश होकर गिर भी पड़ीं। हंगामे का मुख्य कारण यह था कि यहां आने वाली अधिकांश छात्राएं मुस्लिम हैं और काले रंग का बुर्का पहन कर आने वाली थीं।
हुआ यूं कि सोमवार को रामपुर में सोमवार को कन्या विद्या धन का वितरण होना था, जिसमें स्वयं सीएम अखिलेश यादव को शिरकत करनी थी। लेकिन कार्यक्रम के पहले बिजनौर की डीएम सारिका मोहन ने तालिबानी फरमान जारी कर दिया। इस फरमान के अंतर्गत छात्राओं को काले कपड़े पहनने पर रोक लगा दी। यही नहीं उनसे कहा गया कि जींस टॉप पहन कर कोई भी छात्रा कन्या विद्या धन का प्रमाणपत्र लेने नहीं आये।

इसके चलते सुबह से ही छात्राओं में रोष व्याप्त हो गया और छात्राओं ने आयोजन स्थल के बाहर धरना दे दिया। इस दौरान कई छात्राओं ने अखिलेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। नारेबाजी करते हुए छात्राएं सड़क पर आ गईं।
फरमान के खिलाफ आगे आये मौलाना
असल में रामपुर मुस्लिम बहुल्य शहर होने की वजह से इस कार्यक्रम में आने वाली छात्राओं में अधिकांश लड़कियां मुस्लिम परिवार से थीं। ऐसे में जब फरमान काले रंग के कपड़े नहीं पहन कर आने का आया, तो सवाल उठा कि क्या लड़कियां काले रंग के बुर्के में भी नहीं जा सकती हैं। बस इसी बात को लेकर छात्राओं ने हंगामा कर दिया।
उधर शहर के कई मौलानाओं ने इस फरमान की कड़ी आलोचना की है। बिजनौर की जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अनवर-उल-हक ने कहा, "डीएम का यह फरमान काले कपड़ों पर रोक नहीं है बल्कि बुर्का पहनने पर रोक है। मैं डीएम साहिबा से कहना चाहूंगा कि वो मुसलमानों की भावनाओं से खिलवाड़ न करें, नहीं तो अंजाम बुरे होंगे।"
वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा, "अभी तक तो अखिलेश सरकार काले झंडों से डरती थी, तो क्या अब काले कपड़े से भी डरने लगी?"












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