गुजरात में नरेंद्र मोदी की महाभारत

Narendra Modi
गुजरात विधानसभा चुनाव 2012 में मोदी का महाभारत कसौटी पर है। ऐसा क्यों कह सकते हैं? नरेन्द्र मोदी पहली बार तो चुनावी नेतृत्व नहीं कर रहे। इससे पहले उन्होंने 2002 और 2007 में दो बार भाजपा को भारी बहुमत दिलाया है। इस बार भी अब तक के रुझानों और सर्वेक्षणों का यही निष्कर्ष निकल रहा है कि गुजरात का किला फतह करना मोदी के लिए मुश्किल नहीं होगा।

बात तो गुजरात की हो रही है, तो फिर मोदी की कसौटी पर भारत कैसे? यहाँ महाभारत सांकेतिक रूप में ही लिया गया है। मोदी की कसौटी पर भारत ही है, परंतु यदि कोई विषय मोदी जैसे व्यक्तित्व की कसौटी पर हो, तो उसके साथ अपने आप ही महा जुड़ जाता है। अब स्पष्टता किए देते हैं कि मोदी की कसौटी पर महाभारत्यों है?

2002 में मोदी पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात विधानसभा चुनाव का नेतृत्व कर रहे थे। साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के चलते वे जीत गए। फिर उन्होंने अपना विस्तार और अपनी छविको विकास में रूपांतरित किया और 2007 का चुनाव भी जीते, परंतु इन ग्यारह वर्षों के दौरान गुजरात में मोदी द्वारा किए गए कार्य और दिल्ली में ऐसा बहुत कुछ घट गया कि मोदी का विस्तार गुजरात से बाहर देशव्यापी होता गया। इतना ही नहीं उनका नाम भारत के भावी प्रधानमंत्री के रूप में भी लिया जाने लगा।

ऐसे में मोदी भले ही खुल कर न कहें, परंतु उनके मन में भी देश का प्रधानमंत्री बनने की यदि महत्वाकांक्षा जागी हो, तो वह गलत नहीं है। संभव हैकि वे जिस तरह गुजरात के विकास का दावा करते हैं, उसी तरह का विकास देश का भी करने का सपना देखते हों, लेकिन मोदी जानते हैं कि उन्हें अपना यह सपना साकार करने के लिए पहले गुजरात विधानसभा चुनाव 2012 का महत्वपूर्ण पड़ाव सफलतापूर्वक पार करना होगा। उसके बाद ही उन्हें महाभारत की जंग यानी लोकसभा चुनाव 2014 में कोई भाव या वजन मिलेगा। इसीलिए इस चुनाव में मोदी का महाभारत कसौटी पर कहा जा सकता है।

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