गुजरात चुनाव: आखिर क्यों मणिनगर है मोदी की पहली पसंद?
(अंकुर कुमार श्रीवास्तव)। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज मणिनगर विधानसभा सीट से पर्चा भर दिया है। मणिनगर, यह पहला योजनाबद्ध शहर है जिसे वल्लभ भाई पटेल ने बसाया था। मगर अब मणिनगर की पहचान नरेन्द्र मोदी के साथ जुड़ गया है। मणिनगर में नरेन्द्र मोदी की अच्छी पकड़ है। सीधे शब्दों में कहें तो मणिनगर नरेन्द्र मोदी की पसंदीदा जगह है। तो आईए आज विस्तार से चर्चा करते हैं कि क्यों है मणिनगर नरेन्द्र मोदी की पहली पसंद?

विकास और विकास की आस के बीच बसा मणिनगर एक ऐसा शहर है जिसकी जमीन पर खड़े होकर नरेन्द्र मोदी आज राजनीति में बरगद बने हैं। मोदी के नेतृत्व के कायल लोगों को यहां ढूंढने की जरुरत नहीं पड़ती। यहां के लोगों का तो खुले तौर पर कहना है कि अगर विकास चाहिए तो मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह ही होना चाहिए। मणिनगर अहमदाबाद जिले की 21 विधानसभा सीटों में से एक है। उम्मीदवारों को बदलकर अपनी जीत का फार्मूला तलाशने वाले मोदी अपनी सीट बदलने को तैयार नहीं हैं और तरक्की के दम पर मोदी पर तीसरी बार मणिनगर से ही चुनावी मैदान में हैं।
मणिनगर में तरक्की का सवाल पूछने पर सिर्फ दो ही बातों का जिक्र होता है। एक बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) और दूसरा तमाम फ्लाइओवर्स। यह सच है कि बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम ने मणिनगर के लोगों की जिंदगी आसान कर दी है और सिर्फ यही अकेला सस्ता, सुबिधाजनक व शानदार परिवह सिस्टम मोदी को चुनाव जिताने के लिये काफी है। इसके अलावा अगर बात करें तो नरेन्द्र मोदी महिलाओं में जबरदस्त लोकप्रिय हैं। मणिनगर में 42 फीसदी महिला वोट है और मोदी इसे लेकर चिंता मुक्त हैं।
कहते हैं कि मणिनगर, गुजरात की राजनीति का वो टकसाल है जहां मोदी के नाम का सिक्का ढ़लता है और चलता है। इसलिये मोदी के लिये मणिनगर से सुरक्षित सीट कोई और हो ही नहीं सकती। आंकड़ों पर चर्चा करें तो 1990 से लगातार यह सीट भाजपा के खाते में हैं। वहीं परिसीमन के बाद मणिनगर सीट मोदी के लिये और भी महफूज हो गई हैं क्योंकि यहां अल्पसंख्यकों की तादाद सिर्फ 22 हजार (मुस्लिम- 14 हजार और इसार्इ- 8 हजार) है। कहते हैं कि खुशहालियों और रंगनियों का करीबी रिश्ता होता है। मणिनगर में ऐसे ऐसे रेस्त्रां और मॉकटेल के ठिकाने खुल गये हैं जिसे बड़े-बड़े शहर टक्कर ना दें पायें। वहीं दूसरी तरफ कारोबारियों और नौजवानों में मोदी की गहरी पैठ बन चुकी है जिसे अपनी ओर खींच पाने में कांग्रेस नाकाम रहा है।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस को यहां आखिरीबार 1985 में जीत मिली थी। मोदी की लोकप्रियता इस कदर है कि मणिनगर में उनके विरोध में खुलकर बोलने वाले लोग कम ही मिलते हैं। खैर गुजरात मेुं चुनाव 13 और 17 दिसंबर को है और इसका परिणाम क्या होगा ये वक्त बतायेगा मगर सड़कों से गुजरें तो मणिनगर में मोदी के विकास का तिलस्म नजर आता है और वो भी चमकता-दमकता हुआ।












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