भाजपा के गले की हड्डी बने राम जेठमलानी

गडकरी को लेकर कई नेताओं ने निजी हमले तक कर डाले हैं, लेकिन भाजपा कुछ भी सुनने को तैयार नहीं। हाल ही की बात करें तो यशवंत सिन्हा ने गडकरी को पार्टी विरोधी नीतियों में लिप्त बताया। अब राम जेठमलानी ने मोर्चा खोल दिया है। गडकरी विरोधी कैंप में शामिल नेताओं को जहां दिल्ली में बैठे वरिष्ठों ने आंखें दिखा दीं, वहीं जेठमलानी को पार्टी ने सीधे नोटिस थमा दिया।
इससे पहले यशवंत सिन्हा के खिलाफ भी एक मुहिम चली, जिसमें उन पर आरोप लगे कि वो पीछे से छूरा भोंक देते हैं। यह मुहिम चलाने वाले और कोई नहीं बल्कि गडकरी के वो करीबी नेता थे, जिन्हें राज्यसभा भेजने की तैयारी की जा रही थी और सिन्हा ने विरोध किया था। खैर इस समय जेठमलानी पार्टी ने संसदीय समिति के नेताओं का विरोध किया है। इन नेताओं में सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के नाम आते हैं। उनका कहना है कि इन लोगों ने उनके साथ लोकपाल बिल पर कोई चर्चा नहीं की थी।
जेटली ने तो जेठमलानी के सवालों का उत्तर देना मुनासिब नहीं समझा, वहीं पार्टी ने उन्हें नोटिस दे दिया। जेठमलानी ने कहा कि गडकरी भाजपा को आत्मघाती रास्ते पर ले जा रहे हैं। उनके नेतृत्व में यह संगठन पूरी तरह बर्बाद हो जायेगा। जेठमलानी के इस बयान पर फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है, लेकिन यह साफ हो गया है कि जेठमलानी भाजपा के लिये गले की हड्डी बन गये हैं।
वो ऐसे कि अगर पार्टी इस समय उन्हें बाहर का रास्ता दिखाती है, तो उसका असर गुजरात चुनाव पर पड़ सकता है। गुजरात में अगर कोई भी ऊंच-नीच हुई तो नरेंद्र मोदी बर्दाश्त नहीं करेंगे। यही नहीं ऐसा करने पर विपक्षी दलों को मौका मिल जायेगा भाजपा के ऊपर कीचड़ उछालने का। वहीं जेठमलानी को साथ लेकर चलना भी अब दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।












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