एफडीआई मुद्दे सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मुद्दे पर विपक्ष और वामदल बहस करने की मांग कर रहा है जिसके अन्तर्गत संसद में इस पर वोटिंग भी कराई जानी चाहिए। यह नियम 184 के अन्तर्गत आता है जब किसी मुद्दे पर संसद में बहस और वोटिंग कराई जाती है। विपक्ष का सरकार पर यह भी आरोप है कि सरकार ने एफडीआई बिल लाने से पहले ही कहा था कि सभी दलों की सहमति के बाद ही इस पर कोई अंतिम निर्णय लिया जायेगा लेकिन अब सरकार एफडीआई पर बहस करने से बच रही है। वहीं सरकार का कहना है कि यह एक कार्यकारी निर्णय है अत: इस पर संसदीय प्रमाणिकता की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि ऐसा नही है कि एफडीआई मुद्दे पर सरकार के पक्ष में ज्यादा वोट न पड़े तो सरकार गिर जाएगी लेकिन ऐसा होने पर सरकार को शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ेगा और विपक्ष को सरकार के खिलाफ बोलने का मौका मिल जाएगा। तृणमूल कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लेने पर सपा सरकार को समर्थन दे रही है इसलिए सरकार को कोई खतरा नहीं है।
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए डीएमके प्रमुख एम करूणानिधि से बात की लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। उनका कहना है कि वह एफडीआई पर सरकार का विरोध करती है और इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ वोट करेगी। जबकि सरकार की कोशिश यह है कि वह जल्द से जल्द इन मुद्दों को निपटाकर सरकार खाद्य सुरक्षा कानून, लोकपाल बिल के अलावा अन्य मुद्दो को संसद में रखे।












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