Pics: संसद सत्र के पहले दिन गुस्ताखी माफ
अजय मोहन। संसद के शीतकालीन सत्र का पहला दिन हंगामें की भेंट चढ़ा और जनता के करोड़ों रुपए फिर पानी में बह गये। ये पैसे किसी और ने नहीं बल्कि देश की चिंता करने वाले हमारे सांसदों ने बहाये हैं। संसद की कार्यवाही पर प्रति मिनट 20 हजार रुपए का खर्च आता है। इतने भारी-भरकम खर्च के बावजूद हमारे नेताओं को शांति से बात रखना कभी नहीं भाया।
यह पहली बार नहीं हुआ है, ऐसा हर बार होता है। अभी आगे-आगे देखिये होता है। वैसे 50-60 करोड़ हमारे सांसदों के लिये कोई मायने नहीं रखते। 2010 में हमारे सांसदों ने शीतकालीन सत्र पर 95 करोड़ रुपए बर्बाद कर दिये थे और कोई बिल नहीं पास हो पाया था। जी, अरे जी नहीं 2जी बोलिये और 2जी पर आज भी हमारी यूपीए कहती है, "गुस्ताखी माफ"।
आज सत्र की कार्यवाही परवान चढ़ने से पहले सबसे ज्यादा किरकिरी हुई ममता बनर्जी की। ममता दी आज अपने सांसदों से बहुत खफा होंगी, क्योंकि उनके 19 सांसद बीजद छोड़ अन्य किसी भी पार्टी को अपने साथ नहीं ले सके और लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस को खारिज कर दिया। ममता दीदी ने दोपहर को जब मीरा मेमसाहब को कॉल किया तो उधर से एक ही जवाब मिला, "गुस्ताखी माफ"।
एफडीआई पर भाजपा का नोटिस जब स्वीकार कर लिया गया तो सुषमा स्वराज, लाल कृष्ण आडवाणी समेत सभी भाजपा नेताओं की बांछें खिल गईं। इस खबर को सुनकर पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी इतने खुश हो गये, कि शाम को मीडिया से बोल पड़े, "अब भाजपा का सरकार बनाने का समय आ गया है।" गडकरी साहब पहले अपनी पार्टी में फूट को दूर करिये, तब सरकार बनाने का ख्वाब देखियेगा। इस बात पर हम यहां नहीं कहेंगे "गुस्ताखी माफ"!
ये तो रहे शब्दों के बाण, हम आपके लिये कुछ तस्वीरें भी लाये हैं, जो सीधे संसद से ली गई हैं। इन तस्वीरों में सभी को आप बखूबी पहचानते होंगे, लेकिन हम जो सामने लिखेंगे, उस पर हम अभी से कहना चाहते हैं "गुस्ताखी माफ"!

संसद पर खिसियाये टीएमसी सांसद
संसद सत्र शुरू होने के 15 मिनट पहले तक यह साफ हो गया था कि टीएमसी का अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस खारिज हो जायेगा। असल में बीजद के अलावा किसी भी पार्टी के सांसदों ने उनका साथ नहीं दिया। लिहाजा सभी सांसद खिसिया गये और संसद के बाहर प्रदर्शन करने लगे। मजेदार बात यह है कि कई अन्य सांसद आये और उनकी तरफ हंसते हुए अंदर चले गये।

टेंशन फ्री हैं चिदंबरम
संसद भवन में प्रवेश करते केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम इस बार टेंशन फ्री हैं। कारण यह कि इस बार उनके मंत्रालय को लेकर विपक्ष के पास कोई खास बड़े सवाल नहीं हैं। जिस समय प्रदर्शन चल रहा था उसी वक्त प्रवेश करते वक्त चिदंबरम के मन में एक ही बात आयी, "हा हा हा दीदी के भाईयों आज तुम हमारा कुछ नहीं कर पाओगे, हमारे साथ नेताजी और बहनजी हैं।"

प्रिया दत्त मुस्कुराईं और आगे बढ़ गईं
फिल्म अभिनेता संजय दत्त की बहन सांसद प्रिया दत्त भी आज सत्र के पहले दिन अपनी उपस्थिति दर्ज कराने आयीं। गेट पर साथी सांसदों का नाटक देख मुस्कुरायीं और आगे बढ़ गईं।

कनीमोझी के मन में क्या
2जी घोटालों की आरोपी व राज्यसभा सांसद कनीमोझी तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद आज पहली बार संसद पहुंचीं। कनीमोझी की खुशी साफ दर्शा रही थी कि अब उन्हें न 2जी की फिक्र है न 3जी की।

मजा लेने आये लालू
लालू यादव आज कल न तो विपक्ष के साथ हैं और न सत्तापक्ष के साथ। सच पूछिए तो वो आज कल हर मामले में मजा लेते रहते हैं। संसद भवन में प्रवेश करते वक्त लालू के मन में एक ही बात चल रही थी, "इस बार मैं ऐसा भाषण तैयार करके लाया हूं, जिसमें एफडीआई की धज्जियां उड़ जायेंगी। भाजपा का नोटिस स्वीकार हो जाये।"

खिली-खिलीं मायावती बहन
राज्यसभा सांसद मायावती बहन आज खिली-खिली दिखीं। आखिर क्यों न हो, आज उनके भाव जो बढ़े हुए हैं। यूपीए के हर नेता उन्हें हाथों हाथ लेने में लगे हुए हैं।

कृपया कोयला लेकर मत आइयेगा: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद भवन के बाहर मीडिया को संबांधित किया और आगे बढ़ गये। देश के बड़े अर्थशास्त्रियों में से एक हमारे पीएम साहब के मन में आज सिर्फ एक बात चल रही थी, "मंगाई बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था तो सुधार लूंगा, एफडीआई पर सुषमा बहन को समझा लूंगा, बस कोई सांसद आज कोयला लेकर संसद में न आये।"

अंदर भी नहीं माने टीएमसी के सांसद
तृणमूल कांग्रेस के सांसद संसद सत्र शुरू होने के बाद भी नहीं माने। उनकी खिसियाहट तब ठंडी पड़ गई जब अधिकारिक रूप से उनकी नोटिस खारिज हो गई। फिर भी वो हंगामा करते रहे। वो भी उनकी मजबूरी थी, आखिर घर जाकर दीदी को मुंह जो दिखाना था।

भाजपा के सांसदों का भी हंगामा
देखते ही देखते भारतीय जनता पार्टी के सांसदों का भी हंगामा शुरू हो गया। भाजपा के लिये यह हंगामा करना इसलिये जरूरी था, क्योंकि वो देश के किराना दुकानों के मालिकों से वादा करके आयी है, कि चाहे कुछ भी हो जाये एफडीआई को रिटेल में नहीं आने देंगे।

बैठ जाइये, शांत हो जाइये
लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार हर बार की तरह एक ही बात कहती हुईं नजर आयीं, "बैठ जाइये, शांत हो जाइये... आप लोग मानते क्यों नहीं, मेरी बात सुनते क्यों नहीं.... नहीं सुनते तो जाइये अब कल आइयेगा, आज छुट्टी।"












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