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कभी ठेके के सामने चने बेचते थे पॉन्‍टी चड्ढा

Ponty Chadha
नोएडा। उत्‍तर भारत में शराब के सबसे बड़े कारोबारी पौंटी चड्ढा और उनके भाई की शनिवार की दोपहर गोली लगने से मौत हो गई। असल में दोनों ने एक दूसरे पर गोलियां चलायी थीं वो भी 2500 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी में बंटवारे को लेकर। लेकिन क्‍या आपको मालूम है कि पौंटी चड्ढा कभी दारू के ठेके के सामने चने बेचते थे।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक गरीब सिख परिवार में जन्में पौंटी आज की तारीख में शराब के बहुत बड़े कारोबारी थे, लेकिन एक समय ऐसा था जब पौंटी ऊर्फ गुरदीप सिं चड्ढा अपने पिता कुलवंत ङ्क्षसह के साथ एक देशी शराब के ठेके के सामने चने बेचता था। टोकरी में चने बेचने से लेकर पौंटी शराब की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया।

कहा जाता है कि यूपी में आबकारी का कोई भी ऐसा टेण्डर नहीं था जिसमें पौंटी का दखल न होता हो। पूरे उत्तर प्रदेश में देशी विदेशी शराब के वितरण का काम उसकी वेव कंपनी के पास पिछले छह सालों से था। सूत्र बताते हैं कि वह कम कीमत पर शराब खरीदता तथा उसे ऊंची कीमत पर बेचा करता था। लखनऊ के लोग उसे उस वक्त जाने जब दस वर्ष पूर्व गोमती नगर में शहर का पहला मॉल वेव तैयार होने लगा। वेव माल और मल्टीप्लेक्स खुला जिसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था।

पौंटी के पुराने इतिहास पर नजर डालें तो टोकरी में चने बेचने से लेकर शराब कारोबारी के सफर को पौंटी ने कुछ ही वर्षों में तय किया। देखा जाए तो यूपी सरकार पौंटी पर हमेशा ही मेहरबान नजर आयी। कभी मुलायम सिंह यादव ने वेव मॉल के लिए रियायती दामों पर जमीन दे दी तो कभी मायावती ने पूरे प्रदेश में आबकारी के ढेकों के वितरण का अधिकार ही उसे दे दी। इतना ही नहीं मायावती के शासन काल में पौंटी का दखल इस कदर हावी था कि प्रदेश की सहकारी तथा गन्ना निगम की 21 चीनी मिलें उसे कम दामों पर दे दी गयी।

इस बिकवाली में सरकार को 1179 करोड़ रूपये राजस्व का नुकसान हुआ। आरोप लगा की कई चीनी मिलों को उनकी जमीन की कीमत से भी कम कीमत पर बेचा गया। जब पौंटी के खिलाफ आवाजें बुलंद हुई तो गत फरवरी में पौंटी के आवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर आयकर विभाग ने छापे मारे। नोयडा, मुरादाबाद तथा दिल्ली के छतरपुर स्थित फार्म हाऊस पर छापे डाले गए लेकिन नोयडा जांच अधिकारियों को कुछ नहीं मिला।

पौंटी की परेशानी उस वक्त बढ़ी जब उच्चतम न्यायालय ने पिछले सितम्बर में उसे नोयडा में मिली जमीन पर आपत्ति उठायी। नोयडा के 94 किसानों की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल कर अधिग्रहण किया और उसे पौंटी को कम कीमत पर दे दिया।

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