उधार के डिब्बों को दिखाई सोनिया ने हरी झंडी

वर्ष 2006 में रायबरेली में रेल कोच फैक्ट्री को स्वीकृति मिली तथा अगले साल तत्कालीन रेलमंत्री लालू यादव व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने फैक्ट्री की आधारशिला रखी। इस बात को आज पांच वर्ष हो रहे हैं, लेकिन फैक्ट्री में एक भी नया कोच नहीं बना। हालांकि श्रीमती गांधी ने बुधवार को इस फैक्ट्री का उद्घाटन कर दिया।
उद्घाटन समारोह के अवसर पर डेढ़ दर्जन कोच फैक्ट्री की पटरियों पर दौड़ते हुए दिखायी दिए जबकि चालीस के करीब अन्य कोचों का डेंट पेंट हो रहा था। यह वही कोच हैं जो फैक्ट्री का काम शुरू होने के बाद कपूरथला से यहां आए थे।
सोनिया गांधी बुधवार को रायबरेली में थीं, जहां उन्होंने रायबरेली में बनी देश की तीसरी रेल कोच फैक्ट्री का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि रेल कोच फैक्ट्री को बहुत कम समय में तैयार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि रेल कोच फैक्टरी के शिलान्यास के वक्त कुछ लोगों ने तरह-तरह की अफवाहें फैला रहे थे। लेकिन रेल मंत्रालय ने उन्हें गलत साबित करते हुए कारखाने को इतनी जल्द तैयार कर दिया।
सोनिया गांधी ने रायबरेली के लालगंज स्थित रेल कोच फैक्ट्री में 20 बोगियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सूत्रों की मानें तो इस फैक्ट्री के निर्माण पर कुल 2700 करोड़ रुपए खर्च होने हैं, जिनमें से अब तक 800 करोड़ रुपए व्यय किये जा चुके हैं। उपरोक्त बातें तो सरकारी दावे हैं जबकि हकीकत इससे कुछ परे हैं। सूत्र बताते हैं कि पांच सान बीत जाने के बाद भी फैक्ट्री में एक भी कोच का निर्माण नहीं हुआ है।
जिन कोच की दम पर अधिकारी इसका उद्घाटन कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं वह सब उधार के हैं। सूत्रों का कहना हैकि कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री से 55 कोच रायबरेली फैक्ट्री में मंगाए गए थे। इनमें से करीब एक दर्जन को डेंट पेंट कर पटरियों पर यह कहते हुए घुमाया जा रहा है कि वह फैक्ट्री में निर्मित किए गए हैं।
इस हकीकत का खुलासा होने के बाद फैक्ट्री के प्रोजेक्ट मैनेजर एके शुक्ला का कहना है कि 2013 में फैक्ट्री का काम पूरा होना है, जिसके बाद कोच भी बनने लगेंगे। उन्होंने बताया कि कि फैक्ट्री का कुछ हिस्सा अभी बनना शेष है, जिसका टेंडर अभी तक नहीं हो पाया है।












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