चक्रव्यूह रच अभिमन्यु वध की तैयारी में है कांग्रेस

दोनो भाईयो के ऐसा कहने पर लगता है दाल में कुछ काला है। इस पर गौर करने पर दो तीन बाते मोटे तौर पर ध्यान में आती है। कांग्रेस ने मुस्लिम वोट बैंक को अपनी और अधिक करने के लिए विवादित सलमान खुर्शीद का कद बढ़ा कर उन्हे देश का विदेश मंत्री बनाया। सपा तो शायद यह मान रही थी कि सलमान साहब का मंत्री पद जायेगा और मुस्लिमस में कांग्रेस की किरकिरी होगी परन्तु कांग्रेसी पक्के खिलाड़ी है उन्होंने उल्टा कर दिया। यह बात सपा को हजम नही हुई सपा के अतिरिक्त कोई मुस्लिम वोट बैंक को अपना बनाये इसे वो बरदास्त नही कर सकते।
अतः सरकार कभी भी गिर सकती है सपा सुप्रिमों ने कह कर थोड़ी सनसनी फैलाने की कोशिश की। केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का भी डिमोशन होने के आसार लग रहे थे। उनको भी छूआ तक तक नही गया। सपा छोड़कर उसे जमकर कोस कर ही बेनी जी कांग्रेस में गए थे वहां उनका सम्मान भी कही न कही चुबता है। सपा के प्राण तो अल्पसंख्यक वोटों में बसते है। उस पर जो हाथ डालेगा सपा चुप नही बैठेगी। अब केजरीवाल एण्ड कम्पनी ने जितनी कड़ी मेहनत कर सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा को सरकार द्वारा नाजायज लाभ दिलाकर तीन साल में 50 लाख से 300 करोड़ रूपये कमाने का आरोप लगाया उसके बाद वर्तमान विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की ट्रस्ट पर विकलांगो के लिए बटने वाले उपकरणों में धांधली का आरोप लगाते हुए उन्हें मंत्रिमण्डल से बाहर का रास्ता दिखाने का दबाव बनाया वह सब मंत्रिमण्डल विस्तार में फूंस हो गया।
प्रथम आरोपी राबर्ट वाड्रा को हरियाणा सरकार ने क्लीन चीट देते हुए निर्दोष बता दिया। दूसरे आरोपी सलमान खुर्शीद को कानून मंत्री से विदेश मंत्री बना कर उनका कद बढ़ा दिया। टीम केजरी का इस पर बौखलाना स्वाभाविक है। उल्लेखनीय है कि यह कांग्रेस के राणनीतिकारों ने काफी सोच समझ कर किया है। इस पर गौर करने पर पता चलता है कि कांग्रेस ने अपने अभेद दूर्ग में कई द्वार बना रखे है। चौथा द्वार उनकी सुप्रिमों कांग्रेस अध्यक्षा, यूपीए की चेयरमैन श्रीमती सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी का। दूसरा द्वार है प्रियंका गांधी और राबर्ट वाड्रा और तीसरा द्वारा है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का चौथा द्वार है सलमान, दिग्विजय सिंह, मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल जैसो का।
विरोधी प्रथम द्वार पर ही समाप्त हो जाए इसलिए सलमान साहब का कद बढ़ाना अरविंद एण्ड कम्पनी को हत्तोसाहित करना है। विदेश मंत्री अब अपने विरोधियों से निपटने के लिए विदेशी मदद भी लेंगे यानि और अधिक ताकतवर होकर निपटेंगे। उनकी पीट पर श्रीमती सोनिया गांधी का हाथ होना जहां सलमान की ताकत बढ़ाता है। वही जोखिम भरा भी है अगर कही चूक हो गई तो जो शक्ति राबर्ट वाड्रा पर लगनी थी वह उन पर ही लगेगी यानि चाकू सेब पर गिरे या सेब चाकू पर कटना तो सेब को ही है। प्रथम द्वार को श्रीमती सोनिया गाँधी और उनके रणनितिकारों ने इसीलिए इतना मजबूत बनाया है ताकि चौथे द्वार पर हमला करने का तेज विरोधियों में बचे ही नही।
लगभग 55 वर्षो के कांग्रेसी शासन के भ्रष्टाचार युक्त चक्रव्यूह को भेदने का प्रयास डा0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर अटल जी तक ने भी किया। लोहिया, राजनारायण, चन्द्रशेखर जैसे राजनिज्ञों ने भी समय-समय पर किया परन्तु इसको भेद नही पाये कुछ हिलाया भर जरूर। आज भाजपा इस अभेद दुर्ग को भेदने का काम कर रही है। समाजिक आंदोलन भी इसे भेदना चाहते है। समाजसेवी अन्ना हजारे, बाबा रामदेव, अरविंद केजरीवाल आदि इसका ताना बाना बुन रहे है। कांग्रेस पहले की अपेक्षा और अधिक भ्रष्टाचार का साम्राज्य खड़ा करने में बेशर्मी पर उतारू है। अब देखना होगा की उनके इस कुशासन में जनता कितना साथ देगी।
भाजपा पर कांग्रेस वार पर वार कर रही है। भाजपा आज एक शक्तिशाली पार्टी के रूप में स्थापित हो चुकी है। उसका कांग्रेस चाह कर भी कुछ अधिक नही बिगाड़ पायेगी। लेकिन इस चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह ललकारते हुए दाखिल हो चुके केजरीवाल का कही सामाजिक वध न कर दे कांग्रेस इसका देशवासियों को डर है। कहावत है संसार में कोई माँ के पेट से कुछ सीख कर नही आता। इस बात को केवल वीर अभिमन्यु ने झूठा साबित कर दिखाया था महाभारत के युद्ध में। भ्रष्टाचार के अभेद दूर्ग को भेदने की कोशिश जो भी करता है नख से सिख तक भ्रष्टाचार में पली, बड़ी व डूबी हुई कांग्रेस उसका राजनैतिक, सामाजिक वध करने मे नही चुकती। कांग्रेस का इतिहास रहा है भ्रष्टाचार खुब करो जनता के धन को जमकर लूटो, विदेशी बैंको में जमा देश का कालाधन इसका स्पष्ट प्रमाण है। आजाद भारत में सबसे अधिक समय तक शासन इसी पार्टी का रहा है तो भ्रष्टाचार, मंहगाई, पिछडेपन, बेरोजगारी, भूखमरी, बिमारी आदि के लिए वह ही जिम्मेदार भी है।
जब-जब उनके भ्रष्टाचार पर किसी ने वार किया उसने उसको मिटाने मे कोई कोर कसर नही छोड़ी। उस काल में धर्महित अभिमन्यु का बलिदान हुआ था। द्वापर युग में जब धर्म और अधर्म के बीच युद्ध हो रहा था उस समय अधर्मी कौरवों ने पाडवों को हताश करने के लिए एक अभेद दुर्ग की रचना की। उसके 7 द्वारा थे। सातो द्वारों को केवल अर्जुन तोड़ सकता था। अर्जुन के युद्ध भूमि में दूर चले जाने के कारण कौरवों ने षडयंत्र रचा कहा कि यदि कोई वीर हो तो वह चक्रव्युह को तोड़ कर दिखाये। महाबली भीमसेन 6 द्वार तो तोड़ सकता था परन्तु वापस आना नही जानता था। जब अर्जुन अपनी पत्नी को दुर्ग (चक्रव्यूह) को भेदने की बात कह रहे थे तब अभिमन्यु गर्भ में ही सब सुन सका था।
अर्जुन की बात सुनते-सुनते उनकी पत्नी को बीच में ही नींद लग गई इस कारण 7वें द्वार को भेदने और वापस आने की बात वह नही सुन पाई और अभिमन्यु भी नही। युद्धरत भीमसेन कौरवों की ललकार सहन नही कर पा रहे थे उस समय चाचा को परेशान देख वीर अभिमन्यु ने कहां मैं 6 द्वारा तोड़ सकता हूं और वापस भी आ सकता हूं भीमसेन ने भतीजे से कहा 7वां द्वार मैं तोड़ दूंगा चलो कौरवों की चुनौती स्वीकारों। योद्धा अभिमन्यु 6 द्वारो को तोड़ते हुए 7वें मे फंस गया। भीमबली भी चक्रव्यूह में फंस गया। अभिमन्यु को दुर्योधन, जयधरत, कर्ण आदि ने घेर लिया और युद्ध नियमों के विरूद्ध निहत्थे अभिमन्यु को दुष्टों ने मिलकर मार डाला। वीर अभिमन्यु कौरव षड़यंत्र में शहीद हो गया। अब देखना है क्या होता है ?












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