कमजोर प्रशासन की निशानी है साम्प्रदायिक दंगे: बसपा

उन्होंने कहा कि सपा सरकार के पिछले 15 मार्च को गठन के साथ ही आर्थिक स्थिति खराब होनी शुरू हो गयी थी लेकिन हाल के कुछ महीनों में यह बदतर हो गयी है। उन्होंने कहा कि बरेली, प्रतापगढ़ और मथुरा के दंगों के बाद सरकार को सबक लेना चाहिये था लेकिन सरकार सोई रही और फैजाबाद में दंगा हो गया। मायावती ने कहा कि पूरे राज्य में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। पहले मथुरा, बरेली, प्रतापगढ़ और अब फैजाबाद आदि में भी साम्प्रदायिक दंगों व इन शहरों में लम्बी अवधि के कर्फ्यू की स्थिति खासकर काफी ज्यादा चिन्ताजनक बात है क्योंकि यह सभी शहर साम्प्रदायिक स्थिति से हमेशा ही काफी ज्यादा संवेदनशील समझे जाते हैं और यहीं पर सुरक्षा व्यवस्था लगातार चुस्त व दुरुस्त रहनी चाहिए थी।
बसपा प्रमुख ने कहा कि सपा सरकार के लगभग आठ महीने के शासनकाल में ही प्रदेश में काफी ज्यादा स्थानों पर साम्प्रदायिक दंगों व तनाव आदि से समाज के हर वर्ग के लोगों में दहशत है एवं उनमें असुरक्षा का माहौल है। सपा सरकार के रवैये ने पुलिस और प्रशासन को भी पंगु जैसी स्थिति में ला खड़ा किया है। अपराधियों के बजाय पुलिस व प्रशासन में काम करने वाले असफरों में खौफ है। उन्होंने अपने पूर्व के शासन को बेहतर बताते हुए कहा कि बसपा के शासनकाल में कानून द्वारा कानून का राज कायम था और अपराधी व माफिया या तो जेलों में थे या प्रदेश छोड़कर भाग गये थे।












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