विज्ञापनों में इंदिरा का एकाधिकार, बल्लभ के प्रति विरक्ति!

अहमदाबाद, 31 अक्टूबर। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और स्वतंत्र भारत में समग्र विश्व को भारत की शक्ति का परचम दिखाने वालीं पूर्व प्रधानमंत्री लौह महिला इंदिरा गांधी दोनों को समग्र राष्ट्र आज याद कर रहा है। सरदार पटेल की आज जयंती है, तो इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि है।

देश की स्वतंत्रता व अखंडता के लिए कार्यों के लिए जहाँ सरदार को भुलाया नहीं जा सकता, वहीं देश के लिए दिए गए बलिदान के लिए इंदिरा गांधी को भुलाना असंभव है। आम जनता शायद सरदार और इंदिरा के बीच कोई भेद भी नहीं देखती होगी, परंतु केन्द्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार इन दोनों में शायद भेद करती है, ऐसा लगता है।

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आज के अधिकांश राष्ट्रीय अखबारों को उठा कर देखें, तो इससे स्पष्ट भेद समझ में आ जाता है। अखबारों में आज केन्द्र सरकार द्वारा बड़े-बड़े विज्ञापन दिए गए हैं और विभिन्न राज्यों की सरकारों ने भी इन महानुभावों की स्मृति में विज्ञापन दिए हैं, परंतु केन्द्र सरकारके विज्ञापनों में इंदिरा का एकाधिकार और सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रति विरक्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

कुछ राष्ट्रीय अखबारों के पन्ने उलटने से स्पष्ट है कि अखबारों में इंदिरा गांधी के विज्ञापन अधिक हैं, परंतु सरदार पटेल के कम हैं। कुछ अखबारों में इंदिरा और सरदार के विज्ञापनों का अनुपात 3:1 या 4:1 दिखता है। केन्द्र के इस तरह के रवैये और भेदभाव से स्पष्ट है कि केन्द्र सरकार के विज्ञापनों में इंदिरा का एकाधिकार है और सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रति विरक्ति है।

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