ड्राइविंग लाइसेन्स के लिए जरूरी हो गया स्मार्ट कार्ड

उत्तर प्रदेश मे सारथी साफ्टवेयर पर आधारित ड्राइविंग लाइसेन्स को स्मार्ट कार्ड पर जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गए निर्णय के अनुसार इससे ड्राइविंग लाइसेन्स बनवाने में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने मे सहायता मिलेगी तथा साथ ही परिवहन विभाग के कार्यकलापों में दक्षता तथा पारदर्शिता बढ़ेगी। योजना के अनुसार स्मार्ट कार्ड वाले ड्राइविंग लाइसेन्स के लिए आवेदक को स्वयं परिवहन कार्यालय में उपस्थित होना होगा और कम्प्यूटर पर उसके बायोमैट्रिक्स अंगूठा निशान, फोटो और डिजिटल हस्ताक्षर संरक्षित कर लिये जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार इस तरह जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेन्स का प्रत्येक कार्यालय में डेटाबेस तैयार किया जाएगा और ऐसे लाइसेन्स निरस्त होने पर इसके पुन: किसी अन्य कार्यालय से जारी होने की संभावना नहीं रहेगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इसी प्रकार राज्यों में स्टेट रजिस्टर तथा दिल्ली में नेशनल रजिस्टर तैयार किया जाएगा। स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस धारक चालक का चालान होने की स्थिति में उसके समस्त विवरण स्मार्ट कार्ड की चिप पर दर्ज किये जा सकेंगे जो कार्यालय के कम्पयूटर में दर्ज हो जाएंगे। स्मार्ट कार्ड और कार्यालय के कम्प्यूटर में दर्ज ये विवरण चालक के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई करने में सहायक होंगे। राज्य सरकार स्मार्ट कार्ड वाले ड्राइविंग लाइसेन्स जारी करने की योजना के लिए एनआईसी के नियंत्रण वाली संस्था निक्सी के साथ अनुबंध करेगी।
इसके अलावा राज्य सरकार ने प्रदेश के राजकीय एलोपैथिक चिकित्सा महाविद्यालयों मे कार्यरत प्रवक्ताओं, सहायक आचार्यों, सह आचार्यों, आचार्यों एवं प्रधानाचार्यों को अधिवर्षता आयु प्राप्त करने के बाद सेवानिवृत्ति में सत्रांत लाभ देने का निर्णय लिया है। यह सुविधा उन्हीं को अनुमन्य होगी जो भारतीय चिकित्सा परिषद की संस्तुतियों के अनुसार कोई विषय नियमित रूप से पढ़ाते हैं तथा कम से कम तीन वर्ष से लगातार पद पर कार्यरत हैं। उनका कार्य एवं आचरण संतोषजनक रहा है और उनके विरूद्ध कोई विभागीय अथवा सतर्कता जांच नहीं चली है।












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