कांग्रेस के जाल में फंसे नितिन गडकरी, भाजपा को नुकसान

जी हां इस समय शीर्ष नेताओं का बयान, उनके काम काज और उनके द्वारा की गई पहल में अगर जरा भी चूक हुई, तो उसका भुगतान सीधे पार्टी को करना पड़ेगा। जी हां ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र में गडकरी के साथ हुआ। गडकरी ने उस गोसीखुर्द बांध परियोजना को आगे बढ़ाने के लिये केंद्र सरकार से पैसे की मांग कर डाली। जिस समय गडकरी ने यह पत्र लिखा, उस समय तो वो किसानें के हितैशी के रूप में प्रोजेक्ट हुए। अब पता चला है कि इस परियोजना में गडकरी के मित्र व भाजपा सांसद अजय संचेती और पार्टी नेता मितेश बागडि़या ठेकेदार हैं।
इस बात के उजागर होते ही कांग्रेस ने अपना तुरुप का पत्ता चलते हुए यह बात किसानों के बीच फैला दी और उलटा गडकरी के खिलाफ सवाल दाग दिये कि वो इस परियोजना में इतनी रुचि क्यों दिखा रहे हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस ने गडकरी से पूछा है कि वे ठेकेदारों के हिमायती हैं या किसानों के। गडकरी ने इन सवालों के जवाब में कहा कि वो अभी और पत्र लिखेंगे। क्योंकि किसानों की दुर्दशा उनसे देखी नहीं जाती।
गडकरी ने कहा कि उनमें सिर्फ संचेती नहीं बल्कि 125 ठेकेदार और हैं। रही बात पत्र के लीक होने की, तो गडकरी ने सवाल उठाया कि ऐसे पत्र प्रफुल पटेल और अन्य कांग्रेसियों ने लिखे तब क्यों नहीं लीक किये गये। इससे यह साफ है कि कांग्रेस मुझे अपने जाल में फंसाना चाहती है।
खैर गडकरी अपना दमखम बरकरार रखेंगे, क्योंकि वो मानते हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। लेकिन फिर भी भाजपा की छवि पर असर तो पड़ा ही है। बढ़ती महंगाई और घोटालों के बीच यूपीए सरकार की थू-थू के चलते लोगों का झुकाव कुछ हद तक भाजपा की तरफ दिखने लगा है। अगर ऐसे मामले रोज-रोज आये तो लोगों का मन भाजपा से भी खट्टा हो सकता है।












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